उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी कल्याण परिषद के पूर्व अध्यक्ष और प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने वर्तमान राज्य सरकार पर आंदोलनकारियों की उपेक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया है। देहरादून में पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन केवल भौगोलिक मांग नहीं था, बल्कि यह पहाड़ की अस्मिता, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और महिलाओं के लंबे संघर्ष का प्रतीक था। उन्होंने चिंता जताई कि राज्य गठन के 25 वर्ष बीत जाने के बावजूद कई वास्तविक आंदोलनकारी आज भी अपने उचित सम्मान और बुनियादी सुविधाओं को पाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
सरकारी घोषणाओं का धरातल पर अभाव
धीरेंद्र प्रताप ने अपनी बात रखते हुए कहा कि सरकार द्वारा की गई विभिन्न घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर उनका कोई लाभ पात्र लोगों को नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि योग्य और वास्तविक आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित पड़ी है, जिससे उनमें गहरा असंतोष व्याप्त है। सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने मांग की है कि आंदोलनकारियों के संघर्ष का सम्मान करते हुए उन्हें जल्द से जल्द सरकारी सुविधाओं का लाभ पहुँचाया जाना चाहिए।

