उत्तराखंड में पिछले दिनों हुए पेपर लीक प्रकरण के बाद अधीनस्थ सेवा चयन आयोग अपनी साख बचाने और अभ्यर्थियों का भरोसा फिर से जीतने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसी कड़ी में 416 पदों के लिए रद्द की गई स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा अब आगामी 14 जून को दोबारा आयोजित की जाएगी। इस बार आयोग किसी भी प्रकार की चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता, इसलिए पूरी परीक्षा प्रक्रिया को एक अभेद्य सुरक्षा चक्र के भीतर संपन्न कराने की योजना बनाई गई है। आयोग के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया ने स्पष्ट किया है कि वे नई तकनीकों और सख्त निगरानी प्रणाली के माध्यम से एक पारदर्शी और नकल मुक्त माहौल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि योग्य उम्मीदवारों के साथ न्याय हो सके।
त्रि-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था
परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए इस बार आयोग पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ AI जैसी आधुनिक तकनीक का भी उपयोग करने जा रहा है। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होगा और हर गतिविधि पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए पैनी नजर रखी जाएगी। प्रश्न पत्रों की छपाई से लेकर उनके केंद्रों तक वितरण की पूरी प्रक्रिया को मल्टी-लेयर सुरक्षा सिस्टम से जोड़ा गया है। इसके अलावा, केंद्रों पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस टीम के साथ फ्लाइंग स्क्वॉयड, सेक्टर मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की जा रही है, जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ा जा सके।
भर्ती परीक्षा का ‘लिटमस टेस्ट’
सुरक्षा को और अधिक पुख्ता बनाने के लिए आयोग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए परीक्षा ड्यूटी में तैनात होने वाले पूरे स्टाफ का भी पुलिस सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। अभ्यर्थियों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध और समय से पहले केंद्र पर पहुंचना अनिवार्य शामिल है। इस बड़ी परीक्षा से पहले 31 मई को होने वाली वाहन चालक भर्ती परीक्षा को आयोग अपनी नई सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक ‘लिटमस टेस्ट’ के रूप में देख रहा है। इस छोटी परीक्षा के सफल और सुरक्षित आयोजन के अनुभवों के आधार पर 14 जून की मुख्य परीक्षा की तैयारियों को अंतिम रूप देकर और भी अधिक मजबूत बनाया जाएगा।

