उत्तराखंड लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के नियम बदले हुए तीन साल का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद आज तक न तो आयोग को कोई स्थायी अध्यक्ष मिला है और न ही सदस्यों के रिक्त पदों को भरा जा सका है। इस प्रशासनिक ढिलाई का सीधा असर राज्य की सबसे प्रतिष्ठित पीसीएस परीक्षा सहित कई अन्य महत्वपूर्ण भर्तियों पर पड़ रहा है, जिनके अंतिम परिणाम और प्रक्रियाएं अधर में लटकी हुई हैं।
प्रदेश में बड़ी भर्तियों की जिम्मेदारी संभालने वाला यह आयोग खुद जिम्मेदार पदाधिकारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। डॉ. राकेश कुमार के 11 जून 2023 को इस्तीफा देने के बाद से आयोग की कमान कामचलाऊ व्यवस्था के तहत वरिष्ठ सदस्यों द्वारा संभाली जा रही थी, जिसमें पहले डॉ. जगमोहन सिंह राणा और फिर रविदत्त गोदियाल ने प्रभारी अध्यक्ष के रूप में कार्य किया, लेकिन पिछले दिनों रविदत्त का कार्यकाल भी पूरा होने के बाद से अध्यक्ष की कुर्सी पूरी तरह खाली पड़ी है।
वर्तमान में स्थिति यह है कि आयोग के पास सदस्यों के कुल छह पद स्वीकृत हैं, लेकिन उनके सापेक्ष केवल तीन सदस्य ही बचे हुए हैं, जिससे भर्ती प्रक्रियाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
नियुक्ति के लिए बदले गए अर्हता के कड़े नियम
राज्य सरकार ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग में चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए 25 अगस्त 2023 को इसके नियमों में बड़े बदलाव किए थे, जिसके तहत कैबिनेट ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की सेवा शर्तों के बारे में (संशोधन) विनियम 2023 को अपनी मंजूरी दी थी।
इन नए प्रावधानों के अनुसार, अब आयोग के सदस्यों का चयन एक विशेष समिति के माध्यम से किया जाएगा, जो विज्ञप्ति निकालकर प्राप्त आवेदनों की छंटनी करेगी और एक सदस्य पद के लिए तीन पात्र दावेदारों के नाम मुख्यमंत्री को भेजेगी। नए नियमों में यह शर्त भी अनिवार्य की गई है कि सदस्यों को अपने पूर्व के सरकारी या निजी संस्थान के पदों से इस्तीफा देना होगा।
इसके बाद कार्मिक विभाग ने नवंबर 2023 में एक अध्यक्ष और दो सदस्यों की नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति जारी कर 24 नवंबर तक आवेदन मांगे थे, जिसमें साहित्य, विज्ञान, कला, समाजसेवा, प्रशासनिक और न्याय जैसे क्षेत्रों की गहरी जानकारी रखने वाले श्रेणी-क के कम से कम 10 साल का अनुभव रखने वाले अधिकारियों को पात्र माना गया था, परंतु इस पूरी प्रक्रिया के बावजूद अभी तक नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं और कार्मिक विभाग के अनुसार चयन प्रक्रिया अब भी गतिमान है।
अध्यक्ष न होने से PCS 2024 का अंतिम परिणाम लटका
आयोग के शीर्ष स्तर पर पदाधिकारियों की अनुपस्थिति का सबसे बड़ा खामियाजा प्रदेश के युवाओं और अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि पीसीएस 2024 का अंतिम चयन परिणाम पूरी तरह लटक गया है। नियमानुसार किसी भी मुख्य परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी करने से ठीक पहले आयोग के अध्यक्ष की अध्यक्षता में एक आधिकारिक बैठक का आयोजन होना अनिवार्य होता है।
वर्तमान में स्थायी अध्यक्ष न होने की वजह से यह बैठक आयोजित नहीं हो पा रही है, जिसके कारण न केवल पीसीएस बल्कि अन्य आगामी नई भर्तियों की प्रक्रियाओं को लेकर भी स्थिति पूरी तरह से साफ नहीं हो पा रही है और प्रदेश में रोजगार की गति धीमी पड़ गई है।

