देहरादून। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरे को लेकर प्रदेश भाजपा संगठन पूरी तरह उत्साह में डूबा हुआ है। एयरपोर्ट से लेकर भाजपा प्रदेश कार्यालय तक स्वागत के होर्डिंग, बैनर और झंडों की ऐसी कतारें लगी हैं कि मानो पूरा संगठन “स्वागत महोत्सव” में जुट गया हो। सड़कों के किनारे भाजपा के झंडे बंदनवार की तरह सजाए गए हैं और हर नेता अपने-अपने अंदाज में राष्ट्रीय अध्यक्ष को प्रभावित करने की कोशिश में दिखाई दे रहा है। लेकिन इस पूरे राजनीतिक उत्सव में सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की हो रही है, वह है भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम की गैरमौजूदगी।
दिलचस्प बात यह है कि जहां पार्टी के छोटे से लेकर बड़े नेता तक पोस्टरों में मुस्कुराते हुए दिखाई दे रहे हैं, वहीं प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम सिर्फ होर्डिंगों में नजर आ रहे हैं, जमीन पर नहीं। भाजपा के गलियारों में यही चर्चा गर्म है कि आखिर उत्तराखंड भाजपा के प्रभारी इन बड़े आयोजनों से लगातार दूरी क्यों बनाए हुए हैं?
राजनीतिक हलकों में कानाफूसी है कि चर्चित उर्मिला सनावर प्रकरण में नाम आने के बाद से दुष्यंत गौतम का उत्तराखंड दौरा बेहद सीमित हो गया है। कहा जा रहा है कि जिस तरह उस मामले ने राजनीतिक गलियारों में सुर्खियां बटोरी थीं, उसके बाद से गौतम ने उत्तराखंड से “सुरक्षित दूरी” बना ली है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से लेकर पार्टी के अन्य बड़े आयोजनों तक, प्रदेश प्रभारी की मौजूदगी लगभग नदारद रही। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दौरे में भी वही तस्वीर देखने को मिल रही है।
हालांकि पार्टी पदाधिकारी इस सवाल पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं, लेकिन सफाई देने को जरूर मजबूर हैं। कोई कह रहा है कि दुष्यंत गौतम का राष्ट्रीय स्तर पर व्यस्त कार्यक्रम है, तो कोई यह तर्क दे रहा है कि उनके पास राष्ट्रीय महामंत्री की भी बड़ी जिम्मेदारी है, इसलिए हर कार्यक्रम में मौजूद रह पाना संभव नहीं। लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि जब प्रदेश प्रभारी अपने ही राज्य के इतने महत्वपूर्ण राजनीतिक दौरे में नजर नहीं आएंगे, तो फिर उनकी सक्रियता आखिर कहां दिखाई देगी?
भाजपा कार्यालय के बाहर लगे बड़े-बड़े पोस्टरों में जरूर दुष्यंत गौतम मुस्कुराते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत कर रहे हैं, लेकिन जमीनी राजनीति में उनकी गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी यह सवाल तैर रहा है कि क्या उत्तराखंड भाजपा अब “पोस्टर प्रभारी मॉडल” पर चल रही है?
उधर संगठन के नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। एयरपोर्ट से लेकर कार्यक्रम स्थल तक नेताओं के होर्डिंगों की होड़ लगी हुई है। ऐसा लग रहा है मानो स्वागत कम और शक्ति प्रदर्शन ज्यादा हो रहा हो। हर कोई चाहता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की नजर उस पर पड़े और संगठन में उसकी सक्रियता दर्ज हो जाए।
लेकिन इस चमक-दमक और स्वागत राजनीति के बीच दुष्यंत गौतम की गैरमौजूदगी ने पूरे दौरे को एक अलग राजनीतिक रंग दे दिया है। अब देखना यह होगा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यक्रम में प्रदेश प्रभारी अचानक एंट्री मारते हैं या फिर इस बार भी सिर्फ उनके होर्डिंग ही स्वागत करते नजर आएंगे।

