उत्तराखंड: बिजली संकट से निपटने को पिथौरागढ़ में लगेंगे 62 MW के 4 नए स्मॉल हाइड्रो प्रोजेक्ट्स

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देहरादून। उत्तराखंड जल विद्युत निगम ने प्रदेश में जारी बिजली संकट से निपटने और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के लिए ‘रन ऑफ द रिवर’ आधारित स्मॉल हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर काम तेज कर दिया है। निगम ने पिथौरागढ़ जिले की ईस्टर्न रामगंगा घाटी में कुल 62 मेगावाट क्षमता के 4 नए स्मॉल हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स के निर्माण के लिए निजी कंपनियों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। प्रमुख सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम ने पुष्टि की है कि इन परियोजनाओं को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने की तैयारी है।

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पिथौरागढ़ में शुरू होने वाले इन चार स्मॉल हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स में 15 मेगावाट क्षमता का मुवानी प्रोजेक्ट, 14 मेगावाट क्षमता का कमतोली प्रोजेक्ट, 21 मेगावाट क्षमता का जिम्बा मारम प्रोजेक्ट और 12 मेगावाट क्षमता का अन्य स्मॉल प्रोजेक्ट शामिल है, जिनके माध्यम से उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

राज्य में स्मॉल हाइड्रो प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देने की मुख्य वजह बड़े प्रोजेक्ट्स पर लगा कानूनी विराम है। वर्तमान में 2132 मेगावाट क्षमता की 21 बड़ी जल विद्युत परियोजनाएं केंद्र स्तर और सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण अटकी पड़ी हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार अलकनंदा नदी पर भी नए प्रोजेक्ट्स न शुरू करने का फैसला कर चुकी है, जिससे राज्य के पास सीमित विकल्प ही बचे हैं

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इन विपरीत परिस्थितियों में ऊर्जा विभाग ने छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट्स को सबसे सुरक्षित और असरदार विकल्प माना है। ये परियोजनाएं कम समय में तैयार हो जाती हैं और इनसे किसी बड़े विस्थापन का खतरा भी नहीं रहता

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इसके साथ ही ऊर्जा विभाग ने इन परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए ‘लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड’ का विशेष प्रावधान किया है। इस नीति के तहत प्रोजेक्ट्स से मिलने वाले कुल राजस्व का एक हिस्सा सीधे स्थानीय गांवों में सड़क, पानी और बुनियादी विकास कार्यों पर खर्च किया जाएगा।