पौड़ी / थलीसैंण-पौड़ी जनपद के थलीसैंण विकासखंड के राठ क्षेत्र का ऐतिहासिक बूंखाल मेला इस बार बेहद खास होने जा रहा है। करीब 200 वर्षों से क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बना यह मेला 5 दिसंबर को नए कलेवर में नजर आएगा। कभी नर भैंसों की बलि प्रथा के लिए चर्चित रहा यह मेला वर्ष 2014 से पूरी तरह सात्विक स्वरूप ले चुका है।
इस साल बूंखाल मेले में सबसे बड़ा आकर्षण नए स्वरूप में विकसित किए गए भव्य मंदिर में मां बूंखाल कालिंका की मूर्ति की स्थापना है। विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा के लिए 1 दिसंबर से ही पूजा-अर्चना शुरू हो जाएगी और 5 दिसंबर को मुख्य मेले के दिन मां की मूर्ति नए मंदिर में स्थापित की जाएगी।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां बूंखाल कालिंका राठ क्षेत्र की आराध्य देवी हैं। यह मेला सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि पहाड़ की लोक संस्कृति, परंपराओं और आपसी भाईचारे का प्रतीक भी है। मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ पारंपरिक लोकनृत्य, लोकगीत, स्थानीय हस्तशिल्प और पहाड़ी व्यंजनों की भी झलक देखने को मिलती है।
कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। उन्होंने मेले से पहले बिजली, पानी, प्रकाश व्यवस्था, शौचालय, सड़क और सुरक्षा समेत सभी व्यवस्थाओं को समय से पूरा करने के सख्त निर्देश दिए हैं।कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा, “इस वर्ष का बूंखाल मेला बेहद खास होने जा रहा है। नए मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद विधि-विधान से मां की मूर्ति स्थापित की जाएगी।
माना जा रहा है कि मेले से पहले सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाएंगी।पहले जहां मां को प्रसन्न करने के लिए पशु बलि दी जाती थी, वहीं अब यह प्रथा पूरी तरह बदल चुकी है।”अब श्रीफल, तेल और चुन्नी का चढ़ावा मां को भक्त भेंट करेंगे।

