उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के सेलाकुई और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में पिछले तीन दिनों से चल रहे व्यापक श्रमिक आंदोलनों के कारण कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति पैदा हो गई है. श्रमिकों के उग्र प्रदर्शन, नारेबाजी और कई जगहों पर हुए पथराव की घटनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने रविवार शाम से इन क्षेत्रों में सुरक्षा के लिहाज से धारा 163 लागू करने के कड़े आदेश जारी कर दिए हैं।
जिलाधिकारी सविन बंसल के अनुसार, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से भ्रामक सूचनाएं फैलाकर श्रमिकों को उकसाने की कोशिश की जा रही थी, जिसे रोकने के लिए LIU को भी सक्रिय कर दिया गया है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि औद्योगिक इकाइयों में शांति व्यवस्था बनाए रखने और सरकारी व निजी संपत्ति को नुकसान से बचाने के लिए यह निषेधाज्ञा लागू करना बेहद जरूरी हो गया था।
जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेशों के तहत अब सेलाकुई और संबंधित औद्योगिक क्षेत्रों में पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एक साथ एकत्र होने, सार्वजनिक सभा करने, जुलूस निकालने या किसी भी प्रकार के प्रदर्शन आयोजित करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
सुरक्षा के लिहाज से किसी भी व्यक्ति के लाठी, डंडा, तलवार, ईंट, पत्थर या अन्य कोई भी घातक वस्तु लेकर चलने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. इसके अतिरिक्त, बिना प्रशासनिक अनुमति के लाउडस्पीकर का प्रयोग करने और बसों, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों या अन्य वाहनों के माध्यम से समूह में आकर भीड़ जुटाने पर भी रोक रहेगी; नियमों का उल्लंघन करने वाले या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के खिलाफ पुलिस द्वारा बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
वेतन बढ़ोतरी और अनिवार्य ब्रेक के विरोध में भड़का गुस्सा
इस बड़े आंदोलन की मुख्य वजह मोहब्बेवाला और सेलाकुई स्थित विभिन्न फैक्ट्रियों के बाहर चल रहा श्रमिकों का विरोध प्रदर्शन है, जहां कर्मचारियों ने प्रबंधन पर शोषण और कम वेतन देने का गंभीर आरोप लगाया है. प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि लगातार बढ़ती जा रही कमरतोड़ महंगाई के इस दौर में उन्हें विभिन्न शिफ्टों में काम करने के बावजूद प्रतिमाह मात्र 11 से 12 हजार रुपये ही वेतन दिया जा रहा है।
इसके साथ ही, कर्मचारियों का गुस्सा तब और फूट पड़ा जब सालभर काम करने के बाद उन्हें दिए जाने वाले ‘अनिवार्य ब्रेक’ को समाप्त करने के बजाय उनके ओवरटाइम के पैसे भी रोक लिए गए. इन औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत लगभग 70 फीसदी कर्मचारी अस्थायी हैं, जिन्हें तीन महीने के ब्रेक के बाद दोबारा नए दस्तावेज के साथ नियुक्त किया जाता है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक और पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. श्रमिकों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी वेतन वृद्धि और अन्य मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका यह शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा।
श्रमिक उत्पीड़न पर हरक सिंह रावत ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
उत्तराखंड के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों की अनदेखी और उनके अधिकारों के हनन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है. कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सिडकुल, सेलाकुई, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर की औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत श्रमिकों का गंभीर उत्पीड़न किया जा रहा है।
उन्होंने प्रेस वार्ता में कहा कि अपनी जायज मांगों के लिए आवाज उठा रहे मजदूरों को न्यूनतम वेतन, पीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी और बोनस जैसे बुनियादी लाभों से वंचित रखा जा रहा है, और सरकार समाधान निकालने के बजाय पुलिस बल के जरिए उनकी आवाज दबा रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस सोशल और आर्थिक शोषण को तुरंत नहीं रोका गया, तो कांग्रेस और उसका श्रमिक संगठन ‘इंटक’ राज्य स्तर पर एक बहुत बड़ा और व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर हो जाएगा.

