प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया यूरोपीय देशों की यात्रा ने भारत के वैश्विक और रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। अपनी इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन और नीदरलैंड के राष्ट्रप्रमुखों के साथ बेहद सार्थक द्विपक्षीय वार्ताएं संपन्न की हैं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य रक्षा सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, डिजिटल नवाचार, सतत विकास और आपसी व्यापारिक गतिविधियों को नई गति देना है। इस यात्रा के दौरान न केवल वैश्विक चुनौतियों पर साझा समझ विकसित की गई, बल्कि कई दूरगामी समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए गए, जो आने वाले समय में भारत और इन यूरोपीय देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी प्रगति का एक मजबूत आधार तैयार करेंगे।
रक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों पर व्यापक चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोथेनबर्ग पहुंचने पर अपने स्वीडिश समकक्ष उल्फ क्रिस्टर्सन के साथ रक्षा, व्यापार और उभरती प्रौद्योगिकियों सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए प्रतिनिधिमंडल स्तर की एक उच्च स्तरीय बैठक की। दोनों नेताओं ने व्यापार को नए स्तर पर ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई, जो वर्ष 2025 में पहले ही 7.75 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका था। वार्ता के दौरान दोनों देशों ने हरित ऊर्जा, AI, स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र, लचीली आपूर्ति श्रृंखला, अंतरिक्ष अनुसंधान और जलवायु कार्रवाई के क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती को दर्शाते हुए गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की विरासत से जुड़े ऐतिहासिक उपहारों का आदान-प्रदान भी किया गया, जो 1926 में स्वीडन की उनकी ऐतिहासिक यात्रा की शताब्दी के अवसर को रेखांकित करता है।
रक्षा से लेकर कृषि और जल प्रबंधन तक 17 समझौते
अपनी यात्रा के अगले चरण में प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड का दौरा किया, जहां दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग से लेकर कृषि के आधुनिकीकरण तक के क्षेत्रों में कुल 17 महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी। इन समझौतों में सेमीकंडक्टर उद्योग, ग्रीन हाइड्रोजन के विकास, डेयरी उद्योग और शिक्षा व संस्कृति के क्षेत्र में मिलकर काम करने की योजनाएं शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने डच समकक्ष डिर्क जेटेन के साथ नीदरलैंड के विश्व प्रसिद्ध ‘अफस्लुइतडिज्क बांध’ का दौरा किया और वहां की उन्नत डच जल प्रबंधन तकनीक की जमकर सराहना की। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत देश में सिंचाई व्यवस्था को उन्नत करने, बाढ़ सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतर्देशीय जलमार्ग नेटवर्क का विस्तार करने के लिए नीदरलैंड की इस अत्याधुनिक और अभूतपूर्व तकनीक को भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

