देहरादून के रानीपोखरी गांव को हल्के में मत लेना..जी हां यकीन मानिए कुछ लोगों के लिए बेशक रानीपोखरी कुछ अहमियत न रखता हो लेकिन पेयजल महकमें के लिए रानीपोखरी खास है। रानीपोखरी को जल जीवन मिशन 2.0 के उस प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है जहां पीने के पानी की सप्लाई हो या उसका मेंटीनेंस या फिर पेयजल के भुगतान का बिल सब कुछ स्मार्ट तरीके से होगा।
इतराने की खास वजह ये है कि, पेयजल महकमे ने स्मार्ट सप्लाई के पॉयलेट प्रोजेक्ट में पूरे राज्य से सिर्फ दस इलाकों को चुना गया है। इन दस इलाकों में डोईवाला विकासखंड का रानीपोखरी भी है। रानीपोखरी का ग्रांट इलाका हो या मौजा, आने वाले वक्त में पानी सप्लाई के मैप पर स्मार्ट सप्लाई की फेहरिश्त में दिखाई देंगे।
बहरहाल पॉयलेट प्रोजेक्ट के तहत रानीपोखरी इलाके में पानी के स्मार्ट मीटर लगेंगे। इनका फायदा ये होगा कि विभाग को उपभोक्ता को बिल की हार्डकॉपी भेजने की जहमत नहीं उठानी पड़ेगी। फोन पर मीटर की फोटो खींचते ही रानीपोखरी में उपभोक्ता को उसका बिल मोबाइल पर मिल जाएगा। बस इस सहूलियत का फायदा उठाने के लिए उपभोक्ता को एप डाउनलोड करना पड़ेगा।
इतना ही नहीं जलजीवन मिशन के दूसरे चरण के इस पॉयलेट प्रोजेक्ट में महकमे को उस पाइप लाइन का पता भी चल जाएगा जहां पानी लीकेज हो रहा है। बहरहाल उत्तराखंड को पानी सप्लाई की इस स्मार्ट योजना के लिए 1600 करोड़ मिलेंगे। पेयजल निगम को यह बजट वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट के तहत मिलेगा। इस प्रोजेक्ट में पेयजल के मीटर मोबाइल एप से जुड़ेंगे तो वहीं पाइप लाइन में लीकेज सेंसर भी लगेंगे। खबर है कि सितंबर तक इस प्रोजेक्ट के टेंडर हो जाएंगे।
बहरहाल योजना अच्छी है बस देखना ये है कि काम कितनी जल्दी और कितने सलीके से हो पाता है। बहराहल इतना तो तय है कि अगर काम योजना के मुताबिक हुआ तो रानीपोखरी समेत सभी दस इलाके के उपभोक्ताओं को बिल के लिए पानी के दफ्तर में चक्कर नहीं काटने पड़ेगे। फोन पर क्लिक करते ही पानी की खपत का बिल हाजिर हो जाएगा।
हालांकि माना जा रहा है कि स्मार्ट मीटर वाली इस योजना के बाद उपभोक्ता पानी की खपत भी स्मार्ट और किफायती तरीके से करेंगे। क्योंकि जितना पानी खर्च होगा बिल भी उतना आएगा। मिनिमम और मैग्जीमम या फिर नॉन रीडिंग का चक्कर ही खत्म हो जाएगा।

