उत्तराखंड के देहरादून जिले के विधानसभा क्षेत्र-18 धर्मपुर में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक तैयारियां पूरी तेजी से शुरू हो गई हैं। निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी गौरव चटवाल की देखरेख में आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान निर्वाचन विभाग ने विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, बीएलओ और सुपरवाइजरों को इस अभियान की विस्तृत रूपरेखा साझा की है।
इस महाअभियान का मुख्य उद्देश्य आगामी चुनाव से पहले मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित, पारदर्शी और अपडेटेड बनाना है, जिसे लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए बेहद जरूरी बताया गया है। आगामी 8 जून से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम के तहत प्रशासनिक अमला और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता आपसी समन्वय के साथ काम करेंगे ताकि क्षेत्र के किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से न छूटे।
8 जून से शुरू होगा SIR
धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए निर्वाचन विभाग ने एक विशेष शेड्यूल तैयार किया है। इस तय कार्यक्रम के अनुसार, आगामी 8 जून से 7 जुलाई तक सभी बूथ लेवल अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित करेंगे।
इसके बाद, अगले चरण में 8 जून से 7 जुलाई तक उन भरे हुए प्रपत्रों को वापस प्राप्त करने की प्रक्रिया संचालित की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक बूथ स्तर पर होने वाली इस पूरी प्रक्रिया की नियमित रूप से डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि अभियान की पारदर्शिता बनी रहे।
इस अभियान की शुरुआत 29 मई से 7 जून 2026 तक गणना प्रपत्रों की प्रिंटिंग और कर्मचारियों के प्रशिक्षण से होगी। इसके बाद, 8 जून से 7 जुलाई 2026 तक BLO द्वारा घर-घर जाकर गणना प्रपत्रों का वितरण और संकलन किया जाएगा। फिर 7 जुलाई 2026 को मतदान केंद्रों का पुनर्गठन होगा और 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट रोल का प्रकाशन किया जाएगा।
इसके बाद जनता के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज करने का समय 14 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक रहेगा, जबकि नोटिस जारी करने और इन दावों/आपत्तियों का निस्तारण करने की अवधि 10 जुलाई से 11 सितंबर 2026 तक तय की गई है। अंत में, इस पूरी प्रक्रिया के बाद 15 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
अनमैप मतदाताओं पर होगी सख्त कार्रवाई
मतदाता सूची को पूरी तरह प्रामाणिक और शुद्ध बनाने के लिए इस बार तकनीकी विसंगतियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ यानी डेटा में पाई जाने वाली तार्किक त्रुटियों और अनमैप मतदाताओं के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
अभियान के दौरान जिन मतदाताओं के सरकारी रिकॉर्ड या पते में किसी भी प्रकार की विसंगति या दोहराव पाया जाएगा, उन्हें विभाग की ओर से नियमानुसार नोटिस जारी किए जाएंगे। इन नोटिसों के माध्यम से संबंधित मतदाताओं की स्थिति का भौतिक सत्यापन किया जाएगा, जिससे फर्जी नामों को सूची से हटाया जा सके और डेटा को व्यवस्थित किया जा सके।
राजनीतिक दलों से विशेष सहयोग की अपील
अभियान को जमीनी स्तर पर सुचारू रूप से चलाने के लिए फॉर्म जमा करने के नियमों को भी कड़ा किया गया है, जिसके तहत बीएलए-2 प्रतिदिन एक निर्धारित संख्या में ही फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 बीएलओ को उपलब्ध करा सकेंगे। निर्वाचन विभाग ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे अभियान की शुरुआत से पहले अपने स्तर पर रिक्त पड़े बीएलए-2 पदों पर नियुक्तियां जल्द से जल्द पूरी कर लें। राजनीतिक दलों और स्थानीय पार्षदों के सहयोग से ही फील्ड स्तर पर आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों का त्वरित समाधान किया जाएगा और प्रत्येक मतदाता का सही सत्यापन सुनिश्चित हो सकेगा।

