कौशल से आत्मनिर्भरता: मुख्यमंत्री धामी के विजन से अल्मोड़ा में स्वरोजगार की नई क्रांति

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अल्मोड़ा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार युवाओं और महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में कौशल विकास (Skill Development) को सीधे स्वरोजगार से जोड़कर नई संभावनाओं के द्वार खोले जा रहे हैं।

इस मुहिम को अमलीजामा पहनाने के लिए अल्मोड़ा जिले में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संस्थान द्वारा स्थानीय युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार विभिन्न रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

कौशल विकास से स्वावलंबन की राह

मुख्यमंत्री धामी की प्राथमिकताओं में शामिल ‘युवा और महिला सशक्तिकरण’ को गति देते हुए Rseti अल्मोड़ा में ग्रामीण परिवेश के अनुकूल विभिन्न विधाओं में नि:शुल्क ट्रेनिंग दे रहा है। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य केवल हुनर सिखाना नहीं, बल्कि प्रशिक्षण के बाद युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार करना भी है।

सरकारी प्रयास का मुख्य फोकस:

  • कौशल को स्वरोजगार से जोड़ना: युवाओं को ऐसा प्रशिक्षण देना जिससे वे तुरंत अपना व्यवसाय शुरू कर सकें।
  • महिला सशक्तिकरण: ग्रामीण महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र करना।
  • स्थानीय पलायन पर रोक: गांव और जिलों के स्तर पर ही आजीविका के नए साधन विकसित करना।

लोन और बाजार लिंकेज की भी सुविधा

Rseti द्वारा दिए जा रहे इस प्रशिक्षण की खास बात यह है कि यहां ट्रेनिंग पूरी होने के बाद संवर्धित युवाओं को बैंक लोन और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में भी मदद की जाती है, ताकि वे बिना किसी वित्तीय रुकावट के अपना स्टार्टअप या छोटा उद्योग स्थापित कर सकें।

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के इस विजन से न सिर्फ अल्मोड़ा बल्कि पूरे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता (Entrepreneurship) की एक नई लहर देखने को मिल रही है, जिससे युवा अब ‘रोजगार मांगने वाले’ के बजाय ‘रोजगार देने वाले’ बन रहे हैं।

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RSETI है क्या ?

RSETI को हिंदी में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान जबकि अंग्रेजी में इसे Rural Self Employment Training Institute कहा जाता है। यह भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development ) की एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना है। RSETI ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें “नौकरी ढूंढने वाले” के बजाय “खुद का रोजगार शुरू करने वाला” (उद्यमी) बनाता है।

RSETI क्या काम करता है?

RSETI का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके तहत निम्नलिखित कार्य किए जाते हैं:

  • नि:शुल्क प्रशिक्षण (Free Training): ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को विभिन्न व्यवसायों (जैसे- सिलाई, मोबाइल रिपेयरिंग, कंप्यूटर, कृषि, पशुपालन, ब्यूटी पार्लर आदि) में बिल्कुल मुफ्त ट्रेनिंग दी जाती है।
  • रहने और खाने की व्यवस्था: ट्रेनिंग के दौरान युवाओं के रहने और खाने का खर्च भी संस्थान ही उठाता है।
  • बैंक लोन में मदद: ट्रेनिंग पूरी होने के बाद, यदि कोई युवा अपना खुद का बिजनेस या स्टार्टअप शुरू करना चाहता है, तो आरसेटी उन्हें बैंकों से कम ब्याज दर पर लोन दिलाने में पूरी मदद करता है।
  • हैंडहोल्डिंग सपोर्ट: बिजनेस शुरू करने के बाद भी लगभग 2 साल तक संस्थान युवाओं का मार्गदर्शन (Guidance) करता है ताकि उनका काम अच्छे से चल सके।
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इसे कौन चलाता है?

हर जिले में RSETI का प्रबंधन किसी न किसी लीड बैंक (Lead Bank) द्वारा किया जाता है (जैसे- भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, या केनरा बैंक आदि), जिसमें भारत सरकार और राज्य सरकार पूरा सहयोग देती हैं।

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