देहरादून। देश में जारी छात्र आंदोलन और परीक्षा प्रणाली के विवाद को लेकर राजनीति गर्मा गई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने प्रदर्शनकारी छात्रों का खुलकर समर्थन किया है। राहुल गांधी ने जहां सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को तबाह करने का आरोप लगाया, वहीं मुरली मनोहर जोशी ने प्रदर्शनकारी छात्राओं पर हुए बल प्रयोग को बेहद दुखद और पीड़ादायक करार दिया है।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि मोदी सरकार ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर जबरन कब्जा किया और उसे पूरी तरह बर्बाद होने दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को सरकार द्वारा लगातार संरक्षण दिया जा रहा है।
राहुल गांधी ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत उनके पद से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि छात्रों पर हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त जवाबदेही तय हो और प्रधानमंत्री स्वयं देश के छात्रों से सामने आकर माफी मांगें।
दूसरी ओर, भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी के बयान ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को लेकर छात्रों के मन में जो चिंताएं और आशंकाएं हैं, वे पूरी तरह वाजिब हैं। प्रदर्शन के दौरान छात्राओं पर पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग को देखकर उन्हें गहरा दुख पहुंचा है।
मुरली मनोहर जोशी ने चेताया कि युवाओं और छात्रों पर इस तरह बल का इस्तेमाल भारतीय समाज के बड़े हिस्से को ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य से दूर कर देगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस पूरे मामले को महज कानून-व्यवस्था की स्थिति मानकर लाठी या बल प्रयोग से नहीं सुलझाया जा सकता।
वरिष्ठ भाजपा नेता ने सरकार को सलाह दी कि छात्रों के मुद्दों को संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ सुना जाना चाहिए। इसे बल प्रयोग के बजाय बातचीत और एक स्थायी समाधान निकालने की इच्छाशक्ति से ही हल किया जाना चाहिए।

