राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज यानी सोमवार को राष्ट्रपति भवन के भव्य गणतंत्र मंडप में आयोजित होने वाले 2026 के पहले नागरिक अलंकरण समारोह में देश की विभिन्न जानी-मानी हस्तियों को सम्मानित करेंगी। इस विशेष गरिमामयी समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्वारा कुल 66 विशिष्ट नागरिकों को पद्म पुरस्कार सौंपे जाएंगे।
इस बेहद खास और महत्वपूर्ण कार्यक्रम में देश के कई बड़े और गणमान्य चेहरे भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे, जिनमें विशेष रूप से उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हो रहे हैं।
विभिन्न श्रेणियों में बांटे जाने वाले पद्म पुरस्कारों का पूरा विवरण
इस साल आयोजित हो रहे इस पहले नागरिक अलंकरण समारोह में दिए जाने वाले कुल 66 सर्वोच्च नागरिक सम्मानों को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। राष्ट्रपति भवन से मिली जानकारी के मुताबिक, देश के विकास और समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाली इन महान शख्सियतों में से दो विशिष्ट लोगों को देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से नवाजा जाएगा। इसके साथ ही, छह प्रमुख हस्तियों को ‘पद्म भूषण’ सम्मान प्रदान किया जाएगा, जबकि विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय और जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट काम करने वाले 58 नागरिकों को प्रतिष्ठित ‘पद्मश्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
उत्तराखंड के पूर्व CM भगत सिंह कोश्यारी को मिला पद्म भूषण
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को 25 मई को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्मभूषण’ से नवाजा जाएगा, जहाँ राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष गरिमामयी समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें इस सम्मान से अलंकृत करेंगी। 17 जून 1942 को उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के पलनधुरा गाँव में जन्मे कोश्यारी ने अपनी ग्रामीण पृष्ठभूमि की चुनौतियों के बावजूद दृढ़ संकल्प के साथ उच्च शिक्षा हासिल की और वर्ष 1964 में आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की डिग्री पूरी की।
शिक्षा क्षेत्र से अपने सफर की शुरुआत करते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश के कासगंज स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में अध्यापन कार्य किया और साल 1966 में पिथौरागढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना भी की। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति का रुख किया, जहाँ वर्ष 1997 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सदस्य नामित किया गया, और नवंबर 2000 में उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद वे राज्य की पहली अंतरिम सरकार में कैबिनेट मंत्री तथा बाद में प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
उनके इस समृद्ध राजनीतिक सफर में वर्ष 2008 में राज्यसभा सदस्य चुना जाना, साल 2014 में नैनीताल-ऊधमसिंह नगर क्षेत्र से लोकसभा सांसद बनना और 5 सितंबर 2019 को महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में नियुक्त होना शामिल है, जिसके चलते सार्वजनिक जीवन में उनके इसी अतुलनीय योगदान को देखते हुए उन्हें इस सर्वोच्च सम्मान के लिए चुना गया है।

