उत्तराखंड में जनसांख्यिकी बदलाव: जनसंख्या में 26% और परिवारों की संख्या में 40% की भारी बढ़ोतरी

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उत्तराखंड में हाल ही में संपन्न हुई भवन गणना के बाद जनगणना निदेशालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से राज्य की जनसांख्यिकी में बड़े बदलाव के संकेत मिले हैं। बीते डेढ़ दशक में उत्तराखंड की कुल आबादी 26 प्रतिशत बढ़कर 1.27 करोड़ के पार पहुंच गई है, जबकि साल 2011 की जनगणना में यह आंकड़ा लगभग 1.01 करोड़ था। आबादी के साथ-साथ राज्य में परिवारों और मकानों की संख्या में भी अप्रत्याशित उछाल देखा गया है।

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आंकड़ों के मुताबिक अब प्रदेश में कुल परिवारों की संख्या बढ़कर 28.3 लाख और मकानों की कुल संख्या 45 लाख दर्ज की गई है। इस पूरी गणना को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए 24 अप्रैल से शुरू हुए एक महीने के अभियान में 32 हजार से अधिक कार्मिकों ने राज्य के 29 हजार हिस्सों में घर-घर जाकर सर्वे किया, जिसके बाद अब जल्द ही मुख्य जनगणना की शुरुआत की जाएगी।

एकल परिवारों और मकानों की संख्या में उछाल

उत्तराखंड में पिछले 15 सालों के भीतर परिवारों की संख्या में 40 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि राज्य में अब संयुक्त परिवार की पुरानी अवधारणा तेजी से कमजोर हो रही है और एकल (न्यूक्लियर) परिवारों का चलन लगातार बढ़ रहा है। साल 2011 में जहां राज्य में करीब 20 लाख परिवार थे, वहीं अब 8.18 लाख नए परिवारों के अस्तित्व में आने से यह आंकड़ा 28.3 लाख हो गया है।

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इसके समानांतर, रियल एस्टेट सेक्टर में आए जबरदस्त उछाल, नए बुनियादी ढांचे के विकास और नई कॉलोनियों के बसने के कारण प्रदेश में मकानों की संख्या में भी 33 फीसदी का इजाफा हुआ है। पिछले डेढ़ दशक में करीब 11.2 लाख नए मकानों का निर्माण हुआ है, जिसके चलते मकानों की संख्या 2011 के 33.8 लाख से बढ़कर अब सीधे 45 लाख तक पहुंच गई है।

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