उत्तराखंड रोडवेज की विभिन्न कर्मचारी यूनियनों ने सरकार के इस कदम को तानाशाही पूर्ण रवैया बताते हुए आवाज दबाने का गंभीर आरोप लगाया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यात्रा के इस पीक सीजन में भी कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है और जून का महीना आधा बीत जाने के बाद भी अभी तक केवल अप्रैल महीने का वेतन बांटा जा रहा है।
इसके अलावा, रिटायर्ड कर्मचारियों के देयकों का भुगतान न होना और संविदा कर्मियों के नियमितीकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर रोडवेज प्रबंधन पूरी तरह से मौन साधे हुए है। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के अशोक चौधरी, संयुक्त परिषद के विपिन बिजल्वाण और एम्प्लाइज यूनियन के रविनंदन कुमार सहित प्रमुख कर्मचारी नेताओं ने एकजुट होकर सरकार के इस दमनकारी आदेश का पुरजोर विरोध किया है।
उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि एस्मा लगाकर कर्मचारियों को डराने का प्रयास बंद किया जाए और उनके वेतन व बकाये के मुद्दों को तत्काल हल किया जाए। अपनी मांगों को लेकर अब सभी संगठनों ने आपसी मतभेद भुलाकर एक साझा मोर्चा बनाने की रणनीति तैयार कर ली है और वे 30 जून से प्रस्तावित अपने हक की लड़ाई और बड़े आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।

