भारत में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत बेहद चिंताजनक रही है, जिसके कारण इतिहास में 34वीं बार जून का पहला पखवाड़ा सूखा दर्ज किया गया है। मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के हवाले से अभिषेक झा की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अल नीनो के प्रभाव के चलते इस बार मानसून के कमजोर रहने की आशंका सच साबित हो रही है।
जहां 1 जून से 16 जून के बीच देश में सामान्य औसत 69 मिमी के मुकाबले महज 50.3 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है, जो कि 1901 के बाद से इस अवधि की 34वीं सबसे कम बारिश है। 4 जून को केरल तट पर मानसून के समय पर दस्तक देने के बावजूद देश भर में बारिश की कमी घटने के बजाय और ज्यादा बढ़ गई है, जिससे वर्तमान में जून की कुल बारिश 1971-2020 की अवधि के औसत से लगभग 27.1 फीसदी कम चल रही है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस कमी की वजह सिर्फ कमजोर मानसून ही नहीं बल्कि इसकी सुस्त रफ्तार भी है; तय अनुमान के मुताबिक 15 जून तक मानसून को महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और बिहार को पूरी तरह कवर कर लेना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
जून के इस पहले पखवाड़े में महाराष्ट्र (-7.9%), गुजरात (-2.3%), ओडिशा (-2.2%) और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य बारिश की सबसे ज्यादा कमी से जूझ रहे हैं, जबकि इसके विपरीत हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, केरल और राजस्थान जैसे कुछ चुनिंदा राज्यों को इस दौरान मामूली फायदा पहुंचा है।

