प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड की पावन चारधाम यात्रा के शुभारंभ पर देशवासियों के नाम एक भावुक पत्र लिखा है। उन्होंने इस यात्रा को भारत की सांस्कृतिक चेतना का भव्य उत्सव बताते हुए श्रद्धालुओं से पांच प्रमुख संकल्प लेने का आग्रह किया है। पीएम ने कहा कि यह दशक उत्तराखंड का है और राज्य प्रगति के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। उन्होंने यात्रियों को स्वच्छता, सुरक्षा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव बनाने के लिए प्रेरित किया है, ताकि उनकी यह आध्यात्मिक यात्रा एक बेजोड़ अनुभव बन सके।
प्रधानमंत्री के ‘पांच संकल्प’ और स्वच्छता का संदेश
पीएम मोदी ने यात्रियों से पांच विशेष कार्यों का संकल्प लेने को कहा है:
- स्वच्छता: तीर्थस्थलों के आसपास सफाई बनाए रखना और यात्रा को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक मुक्त बनाना।
- पर्यावरण संरक्षण: हिमालयी भूमि के प्रति संवेदनशील रहते हुए प्रकृति की रक्षा करना।
- सेवा और सहयोग: साथी यात्रियों की मदद करना और एकता की भावना को मजबूत करना।
- वोकल फॉर लोकल: अपने यात्रा बजट का कम से कम 5 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय उत्पादों की खरीद पर खर्च करना।
- अनुशासन और मर्यादा: यात्रा के दौरान सुरक्षा नियमों और यातायात निर्देशों का पूरी तरह पालन करना।
डिजिटल उपवास और स्थानीय संस्कृति का प्रचार
प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं को एक अनोखा सुझाव देते हुए ‘डिजिटल उपवास’ का पालन करने को कहा है। उन्होंने आग्रह किया कि यात्रा के दौरान मोबाइल और गैजेट्स का कम उपयोग करें ताकि वे देवभूमि की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक शांति का वास्तविक अनुभव कर सकें। साथ ही, उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स से भी अपील की कि वे उत्तराखंड की स्थानीय कहानियों और छोटी-छोटी परंपराओं को जन-जन तक पहुँचाने में मदद करें।
‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना
लेख के अनुसार, प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों से आने वाले लोगों के संगम से ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना और भी मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा न केवल आध्यात्मिक है बल्कि यह राष्ट्र के प्रति हमारे कर्तव्यों को भी गहराई से जोड़ती है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यह यात्रा भारत की अटूट आस्था का केंद्र है।

