देहरादून। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने राजाजी टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले पीपलकोटी-पशुलोक बैराज मार्ग को चौड़ा करने की योजना पर अपनी असहमति जता दी है। संस्थान द्वारा किए गए अध्ययन में इस मार्ग पर बाघ समेत अन्य दुर्लभ वन्यजीवों की सक्रिय उपस्थिति मिलने के बाद यह रिपोर्ट लोक निर्माण विभाग (PWD) को सौंप दी गई है। WII की इस रोक के बाद अब PWD ने मार्ग को चौड़ा करने के बजाय एलिवेटेड रोड या अंडरपास बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है।
पशुलोक बैराज-गरुड़ चट्टी-पीपलकोटी तक फैले लगभग 22 किलोमीटर लंबे इस जगमोहन मोटर मार्ग का निर्माण वर्ष 1987 में स्वीकृत हुआ था, जब यह क्षेत्र टाइगर रिजर्व घोषित नहीं था। वर्तमान में सिंगल लेन होने के कारण इस मार्ग पर वाहनों का अत्यधिक दबाव रहता है। इसी समस्या से निपटने के लिए लोनिवि ने इसे चौड़ा करने का प्रस्ताव वर्ष 2025 में स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड को भेजा था, जिसने अंतिम निर्णय से पहले WII से अध्ययन कराने का निर्देश दिया था।
WII के अध्ययन के दौरान इस मार्ग पर लगाए गए कैमरा ट्रैप में बाघ और अन्य वन्यजीवों की तस्वीरें कैद हुईं। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि मार्ग चौड़ा करने से बाघों और अन्य वन्यजीवों का प्राकृतिक मूवमेंट बुरी तरह प्रभावित होगा। इसके अलावा, सड़क चौड़ीकरण के लिए क्षेत्र के करीब 3,813 पेड़ों को काटा जाना प्रस्तावित था, जो पर्यावरण और जंगलों के लिए बड़ा खतरा बन सकता था। WII की असहमति के बाद पेड़ों का यह बड़ा कटान भी टल गया है।
WII की रिपोर्ट आने के बाद अब लोक निर्माण विभाग ने वन्यजीवों और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना यातायात सुगम बनाने के लिए आधुनिक विकल्पों पर काम शुरू कर दिया है। लोनिवि ने WII से अनुरोध किया है कि वह इस मार्ग पर एलिवेटेड रोड या अंडरपास के निर्माण की संभावनाओं का पुनः अध्ययन करे, ताकि बिना जंगल को नुकसान पहुँचाए वाहनों की आवाजाही को आसान बनाया जा सके।
लोनिवि के विभागाध्यक्ष राजेश चंद्र शर्मा ने बताया कि WII की सलाह पर अब नए विकल्पों की तलाश की जा रही है। वहीं, अधिशासी अभियंता निर्भय सिंह के अनुसार, यदि इस मार्ग पर एलिवेटेड रोड का निर्माण होता है तो दूरी में लगभग 2 किलोमीटर की कमी आएगी। इससे न केवल समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि पेड़ों का कटान न के बराबर होगा और वन्यजीवों का आवागमन भी पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।

