उत्तराखंड की धामी सरकार ने रियल एस्टेट क्षेत्र में घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए ‘लूट इंडस्ट्री’ पर कड़ा प्रहार करने की तैयारी कर ली है। अब राज्य में हर रियल एस्टेट परियोजना का अनिवार्य बीमा कराने का खाका तैयार किया जा रहा है, ताकि यदि कोई बिल्डर धोखाधड़ी करता है या प्रोजेक्ट अधूरा छोड़कर भागता है, तो खरीदारों की जमा पूंजी सुरक्षित रहे। इसके साथ ही, रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी अब बिल्डरों के विज्ञापनों और ब्रोशर के बजाय वास्तविक सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता पर ध्यान केंद्रित कर रही है। अब बिल्डरों के लिए केवल नक्शा पास कराना काफी नहीं होगा, बल्कि उन्हें खरीदारों की रकम की पूरी गारंटी देनी होगी ताकि भविष्य में किसी भी वित्तीय घोटाले या दिवालियापन की स्थिति में बीमा कंपनी जवाबदेह हो।
बीमा कवच से सुरक्षित होगा खरीदारों का निवेश
रेरा जिस नए मॉडल पर काम कर रहा है, उसके लागू होने के बाद बिल्डर के फरार होने, प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ने या किसी भी प्रकार के वित्तीय गबन की स्थिति में बीमा कंपनी प्रोजेक्ट को पूरा करने या खरीदारों की रकम वापस करने की जिम्मेदारी उठाएगी। यह व्यवस्था केवल निर्माण की गुणवत्ता में कमी होने पर ही नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट की समयसीमा टूटने पर भी खरीदारों को सुरक्षा प्रदान करेगी। इससे बाजार में बिल्डरों की जवाबदेही तय होगी और घर खरीदना केवल एक निवेश न रहकर जीवन भर की पूंजी की सुरक्षित गारंटी बनेगा।
डिजिटल निगरानी से रुकेगी पैसों की हेराफेरी
खरीदारों के पैसे को बिल्डरों के लिए ‘ओपन एटीएम’ बनने से रोकने के लिए अब एस्क्रो अकाउंट व्यवस्था को और सख्त बनाया जा रहा है, जिसके तहत खरीदारों से मिलने वाली 70 प्रतिशत राशि एक अलग खाते में रहेगी। इस पैसे का इस्तेमाल केवल उसी संबंधित परियोजना में किया जा सकेगा और इसकी निकासी के लिए इंजीनियर, सीए और रेरा की संयुक्त निगरानी व डिजिटल रिकॉर्ड अनिवार्य होगा। इससे बिल्डर अब एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरे प्रोजेक्ट में या निजी ऐशो-आराम में खर्च नहीं कर पाएंगे और खरीदार भी ऑनलाइन देख सकेंगे कि उनकी मेहनत की कमाई कहाँ खर्च हो रही है।
प्रोजेक्ट अवधि और पारदर्शिता के नए कड़े नियम
अब बिल्डर अपनी मर्जी से गुपचुप तरीके से प्रोजेक्ट की समयसीमा नहीं बढ़ा पाएंगे; किसी भी प्रकार के संशोधन या अवधि विस्तार के लिए अब सार्वजनिक सूचना जारी करना और आवंटियों से आपत्तियां मांगना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, प्रत्येक रियल एस्टेट परियोजना के लिए एक ‘सेफ्टी फंड’ बनाने का प्रस्ताव है, जिसमें जमा धनराशि को प्रोजेक्ट पूरा होने के पांच साल बाद तक प्रमोटर नहीं निकाल सकेगा। यह फंड भविष्य में प्रोजेक्ट में आने वाली खामियों, रिफंड या विलंब शुल्क के भुगतान के लिए एक सुरक्षा निधि के रूप में काम करेगा, जिससे अवैध कारोबारियों और भ्रष्ट गठजोड़ पर नकेल कसी जा सकेगी।

