दिल्ली में निर्भया जैसा कांड: रात के सन्नाटें में 47 किमी दौड़ रही बस, अंदर 11वीं की छात्रा से होती रही दरिंदगी, ड्राइवर-कंडक्टर गिरफ्तार

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दिल्ली। ग्रेटर नोएडा के परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट बस अड्डे तक चलती स्लीपर बस में 11वीं की छात्रा के साथ दरिंदगी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। इस घटना ने वर्ष 2012 के निर्भया कांड के बाद यात्री बसों में सुरक्षा के लिए तय किए गए कड़े मानकों की पोल खोल दी है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप को तिमारपुर पार्किंग से गिरफ्तार कर लिया है।

सूत्रों के मुताबिक, वारदात में इस्तेमाल स्लीपर बस में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसे ठीक कराने के लिए ड्राइवर और कंडक्टर बस को सूरजपुर स्थित वर्कशॉप ले गए थे। मरम्मत के बाद दोनों खाली बस लेकर वापस तिमारपुर पार्किंग लौट रहे थे। इसी दौरान परी चौक पर अकेली खड़ी 11वीं की छात्रा ने बस को रुकने का इशारा किया।

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छात्रा को अकेला देख दोनों आरोपियों ने दुष्कर्म की साजिश रची और नोएडा सेक्टर-63 ले जाने का झांसा देकर उसे बस में बैठा लिया। रास्ते भर हैवानियत को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने छात्रा को कश्मीरी गेट पर लावारिस छोड़ दिया और स्वयं तिमारपुर पार्किंग पहुंचकर आराम करने लगे, जहां से पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।

परी चौक से एक्सप्रेसवे, चिल्ला बॉर्डर, मयूर विहार और पुरानी दिल्ली होते हुए कश्मीरी गेट तक करीब 47 किलोमीटर के सफर के दौरान बस की खिड़कियों पर भारी पर्दे टंगे थे। इन पर्दों के कारण बाहर से अंदर की कोई गतिविधि नहीं दिख रही थी। हैरानी की बात यह रही कि इस लंबे रास्ते में बस को कहीं भी पुलिस चेकिंग का सामना नहीं करना पड़ा।

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सड़कों से चेकिंग नदारद रहने पर पुलिस का तर्क है कि पूरा मार्ग एक्सप्रेसवे और रिंग रोड का हिस्सा है, जहां बैरिकेडिंग से जाम लग जाता है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि बॉर्डर और प्रमुख चौराहों पर तैनात पुलिस बल ने संदिग्ध रूप से रात में दौड़ रही इस खाली बस को क्यों नहीं रोका।

इस घटना ने 2012 के निर्भया कांड के बाद जस्टिस वर्मा कमेटी की सिफारिशों पर बने सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ा दी हैं। सुप्रीम कोर्ट और मोटर वाहन नियमों के तहत बसों में पर्दों पर सख्त पाबंदी है। इसके अलावा बसों में पैनिक बटन, वीएलटीडी और सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य हैं, लेकिन इस बस में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नदारद थी।

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घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने देर रात पीड़िता के परिजनों को दिल्ली बुलाया और महिला पुलिसकर्मियों की देखरेख में काउंसलिंग के बाद छात्रा को परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों का पौरुषत्व परीक्षण कराने के साथ फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए हैं, जिन्हें डीएनए जांच के लिए भेजा जाएगा।

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