Dehradun News: वैश्विक किल्लत के बीच दून अस्पताल पहुंचा दवाओं का स्टॉक, कीमोथेरेपी शुरू

ख़बर शेयर करें

देहरादून। वैश्विक संकट के बीच राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन ने में कैंसर के मरीजों के लिए प्लेटिन आधारित दवाओं की वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक दवाओं का एक महीने का स्टॉक मंगा लिया है। इससे दून अस्पताल में कीमोथेरेपी और अन्य नियमित उपचार करा रहे सैकड़ों गरीब व जरूरतमंद मरीजों का इलाज फिर से सुचारू हो गया है।

उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्लेटिन आधारित दवाओं की कमी के कारण दून अस्पताल के अनुबंधित वेंडर ने आपूर्ति करने में असमर्थता जताई थी। बाजार में भी इन दवाओं की भारी किल्लत थी, जिससे मरीजों का इलाज बीच में अटकने का खतरा पैदा हो गया था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन के निर्देशों पर तुरंत टेंडर प्रक्रिया पूरी होने तक निजी वेंडर से आपातकालीन आपूर्ति का समझौता किया गया।

यह भी पढ़ें -  दिल्ली में निर्भया जैसा कांड: रात के सन्नाटें में 47 किमी दौड़ रही बस, अंदर 11वीं की छात्रा से होती रही दरिंदगी, ड्राइवर-कंडक्टर गिरफ्तार

अस्पताल के डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. विनम्र मित्तल ने बताया कि कैंसर उपचार के लिए बेहद जरूरी ‘कार्बोप्लेटिन-450’, ‘कार्बोप्लेटिन-150’ और ‘ऑक्सालिप्लेटिन’ दवाओं की करीब एक माह की सप्लाई अस्पताल पहुंच चुकी है। दवाओं की यह खेप सीधे सेंट्रल स्टोर में जमा करा दी गई है, जिससे अब मरीजों को कीमोथेरेपी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

यह भी पढ़ें -  Rishikesh Crime News: सोशल मीडिया की दोस्ती पड़ी भारी, 8वीं की छात्रा से होटल में दुष्कर्म..आरोपी फरार

डॉ. विनम्र मित्तल ने आगे जानकारी दी कि कैंसर मरीजों के लिए एक और महत्वपूर्ण दवा ‘सिस्प्लेटिन’ की आपूर्ति भी अगले एक से दो दिन के भीतर अस्पताल में हो जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वैकल्पिक व्यवस्था के बाद अब दून अस्पताल में इलाज के दौरान कैंसर दवाओं की कोई कमी नहीं रहेगी और नियमित टेंडर प्रक्रिया पूरी होने तक दवाओं का यह बैकअप लगातार जारी रहेगा।

यह भी पढ़ें -  हल्द्वानी मंच शुद्धिकरण विवाद पर CM धामी का पलटवार, बोले-"सनातन को बांटने की साजिश रच रही कांग्रेस"

राजधानी देहरादून समेत आसपास के पर्वतीय जनपदों से दून अस्पताल पहुंचने वाले गंभीर कैंसर पीड़ितों के लिए यह बड़ी राहत है। प्राचार्य के हस्तक्षेप से निजी वेंडर के जरिए कराई गई इस त्वरित आपूर्ति से अस्पताल में इलाज की निरंतरता बनी रहेगी और दूर-दराज से आने वाले मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों से महंगे दामों पर दवाएं खरीदने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad