आजीविका मिशन: 10.29 करोड़ परिवारों के लिए बड़ी खुशखबरी, मिलेगा आंतरिक बाजार

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत देश भर के 10.29 करोड़ परिवारों को एक ही डिजिटल पोर्टल से जोड़ने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। देहरादून में जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस डिजिटल पहल से स्वयं सहायता समूहों को आपस में ही उत्पादों की खरीद-बिक्री के लिए एक बड़ा आंतरिक बाजार मिलेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और करोड़ों परिवारों की आय में भारी इजाफा होगा।

सरकार द्वारा तैयार किया जा रहा यह नया डिजिटल पोर्टल पूरी तरह आधुनिक और AI तकनीक से लैस होगा। इस प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जब भी कोई स्वयं सहायता समूह पोर्टल पर अपनी किसी आवश्यकता या वस्तु की मांग अपलोड करेगा, तो उस उत्पाद का निर्माण कर रहे सभी संबंधित SHG समूहों को तुरंत सिस्टम अलर्ट मिल जाएगा।

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अलर्ट मिलते ही दोनों समूह किसी भी बिचौलिए या मध्यस्थ के बिना आपस में सीधे संवाद स्थापित कर व्यापारिक लेनदेन कर सकेंगे। इससे बिचौलियों का कमीशन खत्म होगा, समय की बचत होगी और उत्पादकों तथा खरीदारों दोनों को आर्थिक लाभ मिलेगा।

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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के आंकड़ों के अनुसार, इस योजना से देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 745 जिलों में फैले 7.31 लाख गांवों के परिवार जुड़े हैं। वर्तमान में करीब 91.75 लाख स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ये परिवार अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार विभिन्न उपयोगी वस्तुओं का निर्माण कर रहे हैं।

इस राष्ट्रीय योजना का बड़ा फायदा उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों को भी मिलेगा, जहां करीब 5 लाख परिवार इस मिशन से जुड़े हुए हैं। राज्य में 69,154 स्वयं सहायता समूह स्थानीय हथकरघा कलाकृतियां, पॉटिंग, चाय, कॉफी और अगरबत्ती जैसे कई उत्पादों का निर्माण कर रहे हैं, जिन्हें अब सीधे देशव्यापी बड़ा बाजार मिल सकेगा।

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इसके अलावा, मिशन से जुड़े समूह जीआई टैग वाले शुद्ध और प्रामाणिक उत्पादों का निर्माण भी कर रहे हैं। आंतरिक बाजार व्यवस्था लागू होने से जीआई टैग वाले इन स्थानीय सामानों की शुद्धता की पूरी गारंटी रहेगी। बिचौलियों की अनुपस्थिति के कारण खरीदार समूहों को ये उत्पाद कम दामों में मिलेंगे और उत्पादक महिलाओं को उनके श्रम का उचित मूल्य प्राप्त होगा।

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