…तो नशा तस्करों के चंगुल में है देहरादून..? दून में नशे का मकड़जाल बना बड़ा सवाल..

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देहरादून। देहरादून में कोई चरस के पकड़ा जा रहा है तो गांजे के साथ और कोई समैक जैसे महंगे नशे के साथ। ये गिरफ्तारियां साफ इशारा कर रही हैं कि देहरादून में नशे के तस्करों का सिंडीकेट काम कर रहा है। उनका धंधा खूब फल फूल रहा है.. खाकी के हत्थे वहीं चढ़ रहे हैं जिनसे कुछ चूक हो रही है।

ऑप्रेशन प्रहार के तहत सोमवार को देहरादून जिले के सेलाकुई थाना पुलिस ने लेबर चौक के पास से जब्बार नाम के आरोपी को स्मैक के साथ गिरफ्तार किया गया। जब्बार जमनपुर का रहने वाला है,,पुलिस दस्तावेजों में पहले ही उसका नाम हिस्ट्रीशीटर के तौर पर दर्ज है। तकरीबन एक दर्जन FIR जब्बार के नाम पर दर्ज हैं। पुलिस ने जब्बार से 8.75 ग्राम स्मैक जब्त की है।

वहीं सेलाकुई के पास विकासनगर कोतवाली क्षेत्र के कुंजा ग्रांट की रहने वाली मुन्नी देवी से रविवार को पुलिस ने 9.7 ग्राम स्मैक बरामद की। आरोपी मुन्नी देवी पहले भी नशा तस्करी के आरोप में जेल जा चुकी है। मुन्नी देवी ने पुलिस को बताया कि वो स्मैक को रुड़की से खरीद कर लाई थी।

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तमाम मीडिया रिपोर्ट साबित कर रही हैं कि देहरादून शहर नशा तस्कारों के बिछाए जाल में फंसा हुआ है और छटपटा रहा है। नशा तस्करों की गिरफ्तारी संकेत दे रही है कि खाकी की आंख में धूल झोंकी जा रही है। मतलब या तो खाकी मुस्तैद नहीं है। या फिर कोई न कोई ऐसी कमजोर कड़ी जरूर है जिसका फायदा तस्कर उठा रहे हैं और धड़ल्ले से दून की वादियों में नशे का सामान बेचा जा रहा है।

हैरत की बात तो ये है कि जो महिलाएं हमेशा से नशे के खिलाफ रहती हैं उसी तबके को नशा तस्करी की चेन में तस्करों ने कड़ी बना रखा है..महिलाएं भी नशा तस्करों के लिए पैडलर का काम कर रही है। बहरहाल बड़ा सवाल ये है कि हर बार नशे के खिलाफ मेराथन होती है पूरा देहरादून शहर दौड़ता है सारी सरकारी मशीनरी नशे के खिलाफ आह्वान करती हैं नारे लगाए जाते हैं अभियान चलाया जाता है बाबजूद इसके दून के थाना चौकियों में नशा तस्करी के आरोप में आरोपी धरे जाते हैं और लगातार धरे जाते हैं।

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मतलब ये है कि नशे के धंधे की रीढ मानी जाने वाली डिमांड और सप्लाई की चेन कैसे बरकरार है। उसकी कड़ियां क्यों नहीं टूट रही हैं। खाकी भीतर चौकस है तो जिले की सरहद पर क्यों नहीं ? सवाल ये भी है कि अगर स्मैक दून में बनती है तो पुलिस की निगाह उन ठिकानों तक क्यों नहीं जा पा रही है।

दून पुलिस का खुफिया तंत्र खामोश क्यों है हरकत में क्यों नहीं है ? और अगर नशे का सामान दूसरे राज्य या दूसरे जिलों से देहरादून के भीतर पहुंच रहा है तो पुलिस निगेहबानी जिले की सरहदों पर किसकी तलाशी ले रही हैं और कैसी तलाशी ले रही हैं जिसमें नशे का सामान अपने स्पॉट पर आसानी से पहुंच जा रहा है।

ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब दून पुलिस को ही खोजना है, जनता तो सवाल पूछेगी ही क्योंकि जनता को खाकी पर ऐतबार है,जनता जानती है कि खाकी जब अपने पर आती है तो पाताल लोक से भी सुबूत खोजकर ला देती है और वैसे भी कहा जाता है शातिर कितना भी होशियार क्यों न हो पुलिस से ज्यादा तीक्ष्ण बुद्धि का न ही हो सकता।

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क्योंकि कानून के हाथ जुर्म से ज्यादा लंबे होते हैं। बशर्ते कोई आका न हो। ऐसे मे जरूरत है खाकी को पैनी नजर के साथ मुस्तैद होने की और बेहद कड़ाई से पेश आने की ताकि नशे के सौदागरों की दुनिया उजाड़ी जा सके और देहरादून में उस नई नस्ल की हिफाजत की जा सके जिसको मुल्क को संवारने के लिए अपनी जवानी लगानी है। बच्चा किसी का भी क्यों न हो वो इस मुल्क का मानव संसाधन है जिसे देश के काम आना है लिहाजा नशे की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता।

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