देहरादून। कुंभ मेला-2027 को सुरक्षित बनाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए उत्तराखंड वन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। हरिद्वार वन प्रभाग में हाथियों के झुंड का नेतृत्व करने वाले ‘लीडर’ हाथी की पहचान कर उसे रेडियो कॉलर पहनाया जाएगा।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई राज्य वन्यजीव बोर्ड और बाघ संचालन समिति की बैठक में इस विशेष योजना की जानकारी दी गई। इससे कुंभ मेले के दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा पुख्ता हो सकेगी।
पारंपरिक तरीके फेल, अब WII की तकनीक का सहारा
हरिद्वार क्षेत्र में हाथियों को आबादी में आने से रोकने के लिए पूर्व में खाई खोदने और सोलर फेंसिंग जैसे उपाय किए गए थे, लेकिन नुकसान की घटनाएं रुक नहीं रही थीं। इसी के चलते अब भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहयोग से वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया गया है। WII की टीम मई महीने से हरिद्वार में हाथियों के झुंड की संख्या, उनके रूट और आबादी में जाने के समय का डेटा जुटा रही है।
अध्ययन के जरिए सबसे पहले झुंड के लीडर हाथी की पहचान होगी। लीडर को रेडियो कॉलर लगते ही जीपीएस सिग्नल के जरिए पूरे झुंड की सटीक लोकेशन ट्रेस होने लगेगी। जैसे ही झुंड आबादी या मेला क्षेत्र की तरफ बढ़ेगा, कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा। इसके बाद वन विभाग की क्विक रिस्पॉन्स टीम मौके पर पहुंचकर हाथियों को वापस जंगल की ओर मोड़ देगी।
WWF ने दिए 4 रेडियो कॉलर, केंद्र की मंजूरी का इंतजार
हरिद्वार वन प्रभाग के डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि WII की अध्ययन रिपोर्ट आते ही कॉलर लगाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इस प्रोजेक्ट के लिए वर्ल्ड वाइड फंड ने वन विभाग को 4 रेडियो कॉलर उपलब्ध करा दिए हैं।
डीएफओ ने बताया कि पिछले कुंभ में भी 4 हाथियों को रेडियो कॉलर लगाए गए थे। इस बार भी हाथियों को कॉलर पहनाने की अनुमति का प्रस्ताव केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा गया है, जहां से हरी झंडी मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।

