गरमियों में रहेगा गला तर, जलसंस्थान का होमवर्क पूरा

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बेशक उत्तराखंड गंगा-यमुना समेत तमाम दूसरी नदियों का मायका है। बावजूद इसके, गर्मियों के मौसम में इसके कई शहर और गांवों के हलक प्यासे रह जाते हैं। गरमियों में चारधाम यात्रा भी उफान पर रहती है लिहाजा पानी की तकलीफ पेयजल महकमे के लिए जी का जंजाल बन जाती है।

हालांकि इस बार सूबे के पेयजल विभाग का दावा है कि कहीं कोई दिक्कत नहीं होगी। उनका होमवर्क पूरा है,बस बजट मिलते ही ड्राफ्ट को धरातल पर अमलीजामा पहना दिया जाएगा। जलसंस्थान के मुख्य महाप्रबंधक इंजीनियर डी.के. सिंह की माने तो पूरे उत्तराखंड में एक हजार साठ ऐसी बस्तियां हैं जहां गर्मियों में पानी के लिए त्राहिमाम मचता है। इनमें ग्रामीण इलाके भी शामिल हैं और शहरी मुहल्ले भी।

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हालांकि जल संस्थान के मुख्य महाप्रबधक डी.के.सिंह कहते हैं इस बार राज्य के नौले-धारों का पानी भी लिफ्ट किया जाएगा ताकि प्यासी बस्तियों की प्यास बुझ सके। वहीं राज्य में मौजूद तकरीबन दस हजार हैंडपम्प्स की निगरानी की जाएगी जो खराब होगा उसे तत्काल प्रभाव से ठीक किया जाएगा ताकि पानी की आपूर्ति सुचारू हो सके। कोशिश रहेगी कि राज्य का कोई भी गांव या शहरी मुहल्ला पानी के लिए न तड़पे।

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बहरहाल देखना ये है कि महकमे के होमवर्क को कितनी तरजीह मिलती है क्योंकि रिपेयरिंग का काम हो या नया काम, हर एक में खर्चा होना है और खर्चे के लिए सरकार को अपनी झोली खोलनी है ताकि उसका इकबाल बलंद रहे। तय है कि जयकारा तभी लगेगा जब गला तर रहेगा।