छात्र राजनीति से भाजपा का दामन थामा और लंबे समय तक भाजपा में रहने के बाद बसपा के हाथी पर चढे और फिर हाथी से उतरकर कांग्रेस का हाथ थाम लिया फिर हाथ को झटका दिया और भाजपा का कमल पुष्प उठा लिया। फिर मन बदला और फिर से हरक सिंह रावत कांग्रेस के पाले में हैं और सिर्फ कार्यकर्ता की हैसियत से नहीं बल्कि बतौर चुनाव प्रबंधन समिति के चैयरमैन के तौर पर । ये है हरक सिंह रावत का सियासी पोर्टफोलियो।
रावत को न केवल तमाम सियासी दलों की कार्यसंस्कृति का अनुभव है बल्कि सत्ता चलाने का अनुभव भी है और राज्य की कई सीटों पर चुनाव लड़कर जीतने का एक्सप्रीरियंस भी है। बहरहाल जब से हरक को कांग्रेस आलाकमान ने चुनाव प्रबंधन समिति का अध्यक्ष बनाया है तब से उन्होने उत्तराखंड की सत्तर सीटों पर कांग्रेस की जीत की स्क्रिप्ट लिखी या नहीं इसका संकेत नहीं मिल रहा लेकिन खुद के लिए कई लोकेशन सिलेक्ट कर ली गई है।
हरक सिहं का दावा है कि वे देहरादून में धर्मपुर समेत सहसपुर विधानसभा क्षेत्र तो पौड़ी की कोटद्वार सीट से और रुद्रप्रयाग सीट से भी तैयारी कर रहे हैं। ताकि पार्टी जहां से चाहेगी वे वहीं से चुनाव लड़ जाएंगे। हरक के दावों से कांग्रेस समेत भाजपा में भी टिकट के दावेदारों की बेचैनी बढ़ गई है। हालांकि होगा क्या ये तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल हरक का दावा मीडिया में सुर्खियां बटोर रहा है। जबकि कुछ कह रहे हैं कि काठ की हांडी बार-बार चूल्हे पर नहीं चढ़ती।

