उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक शारीरिक श्रम की कमी और आधुनिक जीवनशैली में आए बड़े बदलावों के कारण अब ग्रामीण आबादी भी तेजी से शहरों जैसी स्वास्थ्य समस्याओं की चपेट में आने लगी है।
पूर्व में जहां पहाड़ी क्षेत्रों के लोग अपनी सक्रिय दिनचर्या और सही खान-पान की वजह से बेहद कम बीमार पड़ते थे, वहीं हाल के समय में यहां कमर, पीठ, रीढ़ की हड्डी के दर्द, सर्वाइकल, स्पॉन्डिलाइटिस और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से पीड़ित मरीजों की संख्या में भारी उछाल देखा जा रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञ इन बीमारियों का मुख्य कारण लंबे समय तक एक ही पोजीशन में लगातार बैठे रहना, शारीरिक मेहनत से दूरी बनाना और घंटों कंप्यूटर व मोबाइल पर काम करना मान रहे हैं, जिसके चलते अब पहाड़ों में भी फिजियोथेरेपी और बेहतर न्यूरो उपचार की मांग पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा बढ़ गई है।
लगातार बढ़ रही है रीढ़ और नसों के मरीजों की संख्या
श्रीनगर अस्पताल में तैनात रेडियोलॉजिस्ट डॉ. रचित गर्ग ने इन बदलते स्वास्थ्य आंकड़ों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि पहले पर्वतीय क्षेत्रों के स्थानीय निवासियों में सर्वाइकल, स्पॉन्डिलाइटिस और न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर जैसी दिक्कतें न के बराबर या बेहद कम देखने को मिलती थीं।
पूर्व में स्थिति यह थी कि ओपीडी में आने वाले प्रति सौ मरीजों में से इक्के-दुक्के लोग ही ऐसी तकलीफों की शिकायत लेकर आते थे, लेकिन वर्तमान समय में यह ग्राफ तेजी से बढ़कर प्रति सौ मरीजों पर 15 से 20 तक पहुंच चुका है। हालांकि, राहत की बात केवल इतनी है कि मैदानी इलाकों के मुकाबले आज भी पहाड़ों में इन मरीजों की कुल संख्या थोड़ी कम है, लेकिन डॉक्टरों द्वारा मरीजों को इस गंभीर स्थिति से बचने के लिए रोजाना वॉक करने, एक ही पोजीशन में लंबे समय तक न बैठने और घंटों कंप्यूटर स्क्रीन के सामने न बिताने की कड़ाई से सलाह दी जा रही है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी शुरू होगी फिजियोथेरेपी की सुविधा
मरीजों की इस लगातार बढ़ती संख्या और उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार अब राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए फिजियोथेरेपी सेवाओं का व्यापक विस्तार करने जा रही है। अभी तक यह महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधा पर्वतीय क्षेत्रों के केवल बड़े जिला अस्पतालों तक ही सीमित थी, जिससे ग्रामीण इलाकों के मरीजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, लेकिन अब सरकार ने इसका दायरा बढ़ाते हुए उपजिला और सामुदायिक स्तर के छोटे अस्पतालों में भी फिजियोथेरेपी यूनिट शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है।
इसके तहत हाल ही में मेडिकल कॉलेजों से हटाए गए फिजियोथेरेपिस्टों को समायोजित करने और उनकी सेवाएं सीधे आम जनता तक पहुंचाने के लिए इन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष रूप से नए पदों को सृजित करने का निर्णय लिया गया है, जिससे दूरदराज के ग्रामीणों को उनके घर के पास ही बेहतर इलाज मिल सकेगा।

