स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के नवीनतम आंकड़ों ने देश में मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक विकास के क्षेत्र में एक बेहद सुखद और सकारात्मक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अब 95.9 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व आवश्यक स्वास्थ्य देखभाल मिल रही है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी पहुंच को दर्शाता है।
इस क्रांतिकारी सुधार के फलस्वरूप देश के अस्पतालों या मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले सुरक्षित प्रसव का मामला पिछले रिकॉर्ड 88.6 प्रतिशत से बढ़कर अब 90.6 प्रतिशत के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य बीमा और वित्त पोषण योजनाओं ने आम परिवारों पर पड़ने वाले इलाज के खर्च के बोझ को काफी हद तक कम कर दिया है, जिसके कारण कमजोर आबादी के लिए भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं अब आसानी से सुलभ हो रही हैं।
प्रसव पूर्व देखभाल में कुशल कर्मियों की उपस्थिति
स्वास्थ्य मंत्रालय की इस विस्तृत रिपोर्ट से पता चलता है कि गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों के भीतर ही चिकित्सकीय देखभाल पाने वाली माताओं की संख्या पहले के 70.0 प्रतिशत से सुधरकर अब 76.2 प्रतिशत हो गई है। इसके साथ ही, गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार बार प्रसव पूर्व जांच कराने वाली जागरूक माताओं की संख्या भी 58.5 प्रतिशत से बढ़कर 65.2 प्रतिशत दर्ज की गई है।
इस सुधार का सीधा असर यह हुआ कि कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की मौजूदगी में होने वाले सुरक्षित जन्म का आंकड़ा 89.4 प्रतिशत से बढ़कर 91.3 प्रतिशत हो गया है, जबकि प्रसव के शुरुआती दो दिनों के भीतर नवजात शिशुओं की प्रसवोत्तर देखभाल का स्तर भी 79.1 प्रतिशत से सुधरकर 85.3 प्रतिशत पर पहुंच गया है।
पूर्ण टीकाकरण की दिशा में मजबूत कदम
शिशु सुरक्षा के मोर्चे पर भी भारत लगातार अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है, जिसके तहत देश में 96 प्रतिशत से अधिक बच्चों का व्यापक टीकाकरण सुनिश्चित किया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, 12 से 23 महीने की नाजुक उम्र के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण का दायरा 83.8 प्रतिशत की पुरानी दर से छलांग लगाकर अब 87.1 प्रतिशत के स्तर पर आ गया है, जिसमें से अधिकांश बच्चों को टीके सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से बिल्कुल मुफ्त लगाए गए हैं।
इसी तरह, रोटावायरस के टीकाकरण का दायरा 36.4 प्रतिशत से तेजी से बढ़कर 85.4 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जबकि जानलेवा खसरे के टीके की दूसरी खुराक का दायरा भी 58.6 प्रतिशत से काफी आगे बढ़कर अब 71.8 प्रतिशत हो चुका है।
बाल बीमारियों की दर में भारी गिरावट
स्वास्थ्य ढांचे में सुधार और समय पर टीकाकरण के कारण बच्चों में होने वाली गंभीर और मौसमी बीमारियों की दरों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों में होने वाले तीव्र श्वसन संक्रमण के लक्षणों की दर पहले के 2.8 प्रतिशत से घटकर 1.9 प्रतिशत रह गई है, जबकि बच्चों के लिए जानलेवा साबित होने वाली डायरिया की दर भी भारी गिरावट के साथ महज 0.5 प्रतिशत पर सिमट कर रह गई है।
इस सर्वेक्षण में देश भर के 715 जिलों के लगभग 6.79 लाख परिवारों को शामिल किया गया था, जिसमें यह निष्कर्ष निकला कि आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री जन आरोग्य जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज पहुंचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

