राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ के सदस्य अपनी लंबे समय से लंबित मांगों के निस्तारण को लेकर सोमवार से पूरी तरह कार्यबहिष्कार शुरू करने के साथ ही देहरादून स्थित आयुर्वेद निदेशालय में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। चिकित्साधिकारियों का कहना है कि संघ द्वारा शासन और विभागीय अधिकारियों के समक्ष कई बार अपनी जायज समस्याएं रखने के बावजूद अब तक कोई संतोषजनक हल नहीं निकाला जा सका है, जिससे चिकित्सकों में भारी असंतोष व्याप्त है।
मीडिया समन्वयक डॉ. डीसी पसबोला के मुताबिक, संघ की मुख्य मांगों में विभागीय निदेशक की स्थायी नियुक्ति, एसीपी के लंबित प्रकरण, डीएसीपी का लाभ देना, विभागीय ढांचे का पुनर्गठन, पदोन्नति के अवसरों का विस्तार, अध्ययन अवकाश संबंधी विसंगतियों को दूर करना, स्थायीकरण तथा आधार आधारित बायोमेट्रिक मोबाइल ऐप से उपस्थिति दर्ज करने की समस्याओं का समाधान शामिल है।
इस बड़े आंदोलन को राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष अरविंद चौहान और राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विजय बिष्ट ने भी अपना पूर्ण समर्थन दिया है और मांगों के पक्ष में निदेशालय के बाहर एक मानव श्रृंखला भी बनाई गई है।
इस अनिश्चितकालीन धरने का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. नीरज कोहली और महासचिव डॉ. हरदेव रावत सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी कर रहे हैं, जिन्होंने यह साफ कर दिया है कि जब तक मांगों का उचित समाधान नहीं होता, तब तक सभी चिकित्सक रोजाना इसी तरह धरने पर डटे रहेंगे।

