छात्रवृत्ति घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, 3 कॉलेजों की ₹13.83 करोड़ की संपत्ति जब्त

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प्रवर्तन निदेशालय ने बहुचर्चित एससी-एसटी छात्रवृत्ति घोटाले में एक बहुत बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन निजी शिक्षण संस्थानों की करीब 13.83 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को जब्त कर लिया है। यह मामला वर्ष 2011-12 से 2016-17 के बीच अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के छात्रों को मिलने वाली स्कॉलरशिप में बड़े पैमाने पर की गई हेराफेरी से जुड़ा है, जिसकी जांच ईडी साल 2020 से लगातार कर रही है।

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जांच में सामने आया कि हरिद्वार के जिला समाज कल्याण अधिकारी की ओर से कुल 6,208 दावे मंजूर कर करीब 27.98 करोड़ की छात्रवृत्ति बांटी गई थी, जिसमें से 19.74 करोड़ सीधे संस्थानों और 8.24 करोड़ छात्रों के खातों में भेजे गए। हालांकि, गहराई से हुई जांच में खुलासा हुआ कि इनमें से 2,895 दावे पूरी तरह फर्जी थे, जिनके जरिए कुल 13.83 करोड़ रुपये का भारी गबन किया गया।

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घोटाले को अंजाम देने के लिए कॉलेज प्रबंधन ने छात्रों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोले, जिन पर नियंत्रण के लिए कर्मचारियों के फोन नंबरों का इस्तेमाल किया गया और राशि आते ही उसे तुरंत ट्रांसफर या कैश निकाल लिया गया। इस जालसाजी में मनिका शर्मा नाम की महिला का नाम मुख्य भूमिका में आया है, जिसका इन संस्थानों के संचालन पर नियंत्रण था।

ईडी ने कार्रवाई के तहत महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मेरठ) से जुड़ी न्यू ट्यूलिप्स एजुकेशन सोसाइटी की 2.44 करोड़, मदरहुड इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी से जुड़ी सोसाइटी की 3.95 करोड़ और रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज एवं मेडिकल साइंसेज हरिद्वार से जुड़ी मॉडर्न इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट सोसाइटी की 7.44 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं, जो कि अपराध की कमाई से फिक्स्ड डिपॉजिट, जमीन और भवनों में निवेश की गई थीं।