क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी गिरावट, पश्चिम एशिया में तनाव घटने का वैश्विक बाजार पर बड़ा असर

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पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलमार्ग पूरी तरह खुलने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगभग चार महीने के निचले स्तर यानी 70 डॉलर प्रति बैरल के पास आ गई हैं। हालांकि, विशेषज्ञों और ओएनजीसी के पूर्व प्रबंध निदेशक आरएस शर्मा का मानना है कि आम उपभोक्ताओं की जेब तक इस राहत का सीधा फायदा पहुंचने में अभी कम से कम पांच से छह महीने का वक्त लग सकता है।

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ऐसा इसलिए है क्योंकि भारतीय तेल कंपनियों ने अगले एक से दो महीनों के लिए तेल के सौदे पहले ही तय कर रखे हैं और वे अपने पुराने नुकसान की भरपाई भी कर रही हैं। इसके बावजूद, आने वाले समय में कच्चे तेल के दाम गिरने से देश के कई प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को जबरदस्त लाभ पहुंचेगा।

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इससे पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सुचारू होगी, एलपीजी रसोई गैस और सीएनजी-पीएनजी की लागत घटेगी, तथा हवाई ईंधन सस्ता होने से हवाई यात्रा का किराया भी कम हो सकता है। इसके अलावा कच्चे माल की कीमतें घटने से प्लास्टिक, खाद-उर्वरक, पेंट, टायर-रबर और साबुन, डिटर्जेंट, पैक्ड फूड उत्पादों का निर्माण काफी सस्ता हो जाएगा, जिससे कंपनियों के मार्जिन में सुधार होगा।

इसी बीच, ईरान ने भी भारत को रियायती दरों पर कच्चे तेल बेचने के लिए संपर्क साधा है, जो भारत के लिए रुपये-रियाल में व्यापार करने और विदेशी मुद्रा बचाने का एक बड़ा माध्यम बन सकता है। वर्तमान में भारत रूस से सबसे ज्यादा (लगभग 50 प्रतिशत) तेल आयात कर रहा है, लेकिन शर्तों में बदलाव होने पर ईरानी तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए एक बेहतरीन और किफायती विकल्प साबित होगा।

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