देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा राज्य में निकाली जा रही ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर दिल्ली से लेकर देहरादून तक सियासी घमासान मच गया है। कांग्रेस हाईकमान और राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर इस यात्रा पर कड़ी आपत्ति जताते हुए दो टूक कहा है कि पार्टी में किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत कार्यक्रम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटनाक्रम ने उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल ला दिया है और कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी कलह खुलकर सतह पर आ गई है।
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड के सभी चुनावी अभियान केवल पार्टी के आधिकारिक बैनर तले और सामूहिक नेतृत्व में ही चलाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पूर्व सीएम हरीश रावत से मुलाकात के दौरान राज्य के राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा हुई है, जिसका एकमात्र उद्देश्य पार्टी की जीत सुनिश्चित करना है। कांग्रेस नेतृत्व का यह सख्त रुख हरीश रावत द्वारा लगातार किए जा रहे शक्ति प्रदर्शन के बाद सामने आया है।
प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि हरीश रावत अपनी बात रखना चाहते हैं और इस पर पार्टी उनका पक्ष सुनने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी इस पूरे विवाद को लेकर बेहद गंभीर हैं और इस बार पार्टी कोई भी राजनीतिक जोखिम उठाने के मूड में नहीं है।
दूसरी ओर, हाईकमान की चेतावनियों को दरकिनार करते हुए हरीश रावत ने सोमवार को जसपुर से हल्द्वानी तक अपनी जनसंवाद यात्रा निकाली। हल्द्वानी पहुंचने पर समर्थकों ने उनका भव्य स्वागत किया, जिसके बाद रावत ने ऐलान किया कि राज्य की धरती से बदलाव की आवाज उठ रही है और 2027 में कांग्रेस ही बदलाव लाएगी। केसी वेणुगोपाल के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने सफाई दी कि उनकी यात्रा के उद्देश्यों को गलत समझा जा रहा है और वह दिल्ली जाकर हाईकमान के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट करेंगे।
इस अंदरूनी घमासान पर मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर जोरदार चुटकी ली है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने मीडिया से बातचीत में तीखा प्रहार करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से गुटबाजी के चलते अलग-अलग खेमों में बंट चुकी है। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि अब हरीश रावत के लिए पार्टी में कोई सम्मान नहीं बचा है, इसलिए उन्हें राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए।

