हरिद्वार DM का कड़ा एक्शन: 11 मदरसों की ‘पीएम पोषण’ राशि रोकी, छात्र संख्या में मिली भारी हेराफेरी

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हरिद्वार जिले में संचालित मदरसों की प्रारंभिक जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए 11 मदरसों की ‘पीएम पोषण योजना’ की धनराशि पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर की गई इस जांच में यह पाया गया कि कई संस्थानों ने सरकारी लाभ लेने के लिए छात्रों की संख्या वास्तविक संख्या से कहीं अधिक दिखाई थी और मिड-डे मील से संबंधित जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शुरू हुई इस चरणबद्ध जांच के बाद दोषी पाए गए संस्थानों को नोटिस जारी किए गए हैं और प्रशासन अब पूरे मामले की गहराई से छानबीन कर रहा है।

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फर्जी छात्र संख्या और अवैध संचालन का खुलासा

जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि 11 मदरसों में दर्ज छात्रों की संख्या और वहां मौजूद असली छात्रों की संख्या में जमीन-आसमान का अंतर था। लक्सर क्षेत्र में तो एक गंभीर मामला यह भी मिला कि जहां केवल तीन मदरसों के संचालन की अनुमति थी, वहां अवैध रूप से छह मदरसे चलाए जा रहे थे। इन फर्जी आंकड़ों के आधार पर प्रशासन से कक्षा एक से पांच तक के बच्चों के लिए 7 रुपये और कक्षा छह से दस तक के बच्चों के लिए 10 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भोजन की राशि वसूली जा रही थी, जिसे अब संदिग्ध मानकर रोक दिया गया है।

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अभिलेखों में हेराफेरी और प्रशासन की अगली कार्रवाई

प्रारंभिक जांच में शामिल 131 मदरसों में से 23 संस्थान नियमों का पालन करते नहीं पाए गए, जिनमें से कई के पास न तो छात्रों का सही विवरण था और न ही आय-व्यय का कोई स्पष्ट लेखा-जोखा। इसे देखते हुए जिलाधिकारी ने 23 मदरसों की गहन जांच के आदेश देते हुए 15 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) अमित चंद को इस पूरी प्रक्रिया के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जिले के अन्य सभी मदरसों की भी चरणबद्ध तरीके से जांच की जाएगी ताकि सरकारी योजनाओं के नाम पर होने वाले इस खेल को पूरी तरह बंद किया जा सके।