20 साल बाद फिर बोतल से बाहर आया 2004 का जिन्न! जेनी के गंभीर आरोपों से घिरे हरक सिंह रावत, 2016 की घटना का भी किया खुलासा

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देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत और जेनी उर्फ इंदिरा देवरी का मामला सुर्खियों में है। करीब दो दशक पुराने इस प्रकरण ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। आज शनिवार को देहरादून में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जेनी ने हरक सिंह रावत पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनके बयानों ने इस पूरे मामले को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जेनी के आरोपों ने न सिर्फ हरक सिंह रावत की मुश्किलें बढ़ाई हैं, बल्कि महिला सम्मान और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

पत्रकारों से बातचीत में जेनी ने दावा किया कि वर्ष 2004 में जब उनकी उम्र महज 16 साल थी, तब उनके साथ दुष्कर्म हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस घटना के परिणामस्वरूप आज उनका 20 साल का बच्चा है। जेनी का कहना है कि यह मामला उनके जीवन का ऐसा दर्दनाक अध्याय है, जिसे वह इतने वर्षों तक झेलती रही हैं। अब उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखकर न्याय की मांग उठाई है।

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जेनी ने केवल 2004 की घटना तक ही अपने आरोपों को सीमित नहीं रखा, बल्कि वर्ष 2016 का भी जिक्र किया। उनका आरोप है कि उस दौरान हरक सिंह रावत ने उन्हें दिल्ली के ग्रीन पार्क में बुलाया था, जहां उनके साथ फिर शारीरिक संबंध बनाए गए। इन आरोपों के सामने आने के बाद अब सवाल यह है कि आखिर इतने वर्षों से इस मामले में न्याय की प्रक्रिया कहां तक पहुंची और पीड़िता को अब तक क्या मिला?

महेंद्र भट्ट के नाम पर भी जेनी ने तोड़ी चुप्पी

इस पूरे प्रकरण में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का नाम उछाले जाने को लेकर भी जेनी ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि महेंद्र भट्ट को वह जानती तक नहीं हैं। इस बयान के बाद मामले को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं में एक नया पहलू जुड़ गया है। जेनी ने साफ किया कि उनके मामले को किसी दूसरे राजनीतिक व्यक्ति के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

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मुख्यमंत्री धामी का जताया आभार, न्याय की जगी उम्मीद

इस बातचीत का एक अहम पहलू मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लेकर जेनी का बयान भी रहा। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि मुख्यमंत्री ने इतने पुराने मामले को याद रखा और इस संबंध में शिकायत की है। जेनी ने उम्मीद जताई कि अब उन्हें न्याय मिल सकता है।

दरअसल, इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री धामी की ओर से मामले को संज्ञान में लिए जाने की बात सामने आने के बाद पीड़िता को न्याय की उम्मीद बंधी है। अब देखना होगा कि संबंधित एजेंसियां इस मामले में क्या कदम उठाती हैं और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।

हरक सिंह रावत के लिए असहज होते सवाल

राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले हरक सिंह रावत के सामने अब एक बार फिर पुराने आरोपों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। किसी भी जनप्रतिनिधि या पूर्व मंत्री के लिए सार्वजनिक जीवन में नैतिक जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में जब कोई महिला इतने गंभीर आरोपों के साथ सामने आती है तो उन आरोपों की निष्पक्ष जांच और तथ्यों का सामने आना जरूरी हो जाता है।

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सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि यदि जेनी के आरोपों में सच्चाई है तो उन्हें न्याय मिलने में इतना लंबा वक्त क्यों लगा? क्या अब इस पुराने मामले की निष्पक्ष जांच हो पाएगी? क्या पीड़िता की शिकायत पर ठोस कार्रवाई होगी?

फिलहाल जेनी ने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखकर पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। उनके आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। करीब 20 साल पुराने इस मामले में अब सबकी निगाहें प्रशासन और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।