रामपुर तिराहा कांड के घायल आंदोलनकारियों को अब देखरेख के लिए मिलेंगे प्रतिमाह ₹20 हजार, शासनादेश जारी

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देहरादून। उत्तराखंड पृथक राज्य निर्माण आंदोलन के दौरान हुए ऐतिहासिक रामपुर तिराहा कांड में पुलिस की गोलियों का शिकार होकर पूर्णतः शैय्याग्रस्त हुए दो राज्य आंदोलनकारियों के लिए प्रदेश सरकार ने एक बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े निर्देशों के बाद शासन ने इन दोनों लाचार आंदोलनकारियों की देखरेख हेतु ₹20 हजार प्रतिमाह की अतिरिक्त वित्तीय सहायता स्वीकृत कर दी है। इस संबंध में गृह विभाग द्वारा विधिवत शासनादेश भी जारी कर दिया गया है।

शासन द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार, यह अतिरिक्त वित्तीय मदद हरिद्वार जिले के रहने वाले श्री प्रकाश चंद्र कांति और देहरादून निवासी श्री अमित ओबराय को प्रदान की जाएगी। ये दोनों ही राज्य आंदोलनकारी 1994 के रामपुर तिराहा गोलीकांड में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और पिछले कई दशकों से शारीरिक रूप से पूरी तरह बिस्तर पर निर्भर हैं। मुख्यमंत्री के इस मानवीय फैसले के बाद अब इन दोनों पीड़ितों के लिए एक-एक समर्पित सहायक रखा जा सकेगा, जो इनकी नियमित देखभाल कर सकेगा।

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वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा इन दोनों चिन्हित आंदोलनकारियों को ₹30 हजार प्रतिमाह की विशेष सम्मान पेंशन पहले से दी जा रही है। अब इस नए आदेश के लागू होने के बाद, उन्हें मिलने वाली ₹30 हजार की नियमित पेंशन के अतिरिक्त देखरेख के लिए ₹20 हजार की धनराशि हर महीने अलग से दी जाएगी। यानी अब दोनों आंदोलनकारियों को कुल ₹50 हजार प्रतिमाह का सहयोग राज्य सरकार की ओर से प्राप्त होगा, जिससे उनके इलाज और दैनिक दिनचर्या में परिजनों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी।

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उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास में 1 और 2 अक्टूबर 1994 की रात मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा पर हुई घटना को सबसे दर्दनाक अध्याय माना जाता है। दिल्ली में प्रदर्शन करने जा रहे निहत्थे आंदोलनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई में कई लोग शहीद हुए थे, जबकि कई लोग जीवनभर के लिए अपाहिज हो गए थे। प्रकाश चंद्र कांति और अमित ओबराय ऐसे ही आंदोलनकारी हैं, जिन्होंने राज्य निर्माण की वेदी पर अपना संपूर्ण जीवन और स्वास्थ्य न्योछावर कर दिया।

वर्षों से बिस्तर पर पड़े इन आंदोलनकारियों के परिजनों को उनकी 24 घंटे देखरेख करने में काफी व्यावहारिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। परिजनों और आंदोलनकारी संगठनों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जा रही थी कि गंभीर रूप से असहाय हो चुके आंदोलनकारियों के लिए किसी सहायक की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिकारियों को बिना किसी विलंब के वित्तीय स्वीकृति और शासनादेश जारी करने के सख्त निर्देश दिए थे।

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मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देशों के क्रम में शासनादेश जारी होने के बाद संबंधित जिला प्रशासन को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। हरिद्वार और देहरादून के जिलाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि स्वीकृत की गई ₹20 हजार की अतिरिक्त धनराशि दोनों आंदोलनकारियों के बैंक खातों में समय से पहुंचे। सरकार के इस कदम का राज्य आंदोलनकारी मंच और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने स्वागत करते हुए इसे आंदोलनकारियों के त्याग का सच्चा सम्मान बताया है।