नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू की गिरफ्तारी पर रोक लगाने और एफआईआर निरस्त करने की याचिका पर सुनवाई की है। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने मामले में राज्य सरकार और शिकायतकर्ता को आगामी तीन नवंबर तक अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट में दायर याचिका में गिरधारी लाल साहू ने दावा किया है कि शिकायतकर्ता रेखा आर्य द्वारा उनके खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर पूरी तरह से झूठी और बेबुनियाद है। याचिका में कहा गया है कि उनकी और शिकायतकर्ता की शादी वर्ष 2004 में हुई थी और वे तभी से अपनी पत्नी के साथ रह रहे हैं।
दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि गिरधारी लाल साहू ने शिकायतकर्ता के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर उन्हें कई कंपनियों के निदेशक पद से हटा दिया था। इसके अलावा उन पर जान से मारने की धमकी देने और जाति सूचक अपशब्द कहने के भी आरोप लगाए गए हैं। वहीं, याचिकाकर्ता का आरोप है कि उनकी पत्नी रेखा आर्य ने मंत्री बनने के बाद 210 करोड़ की अवैध संपत्ति अर्जित की है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए।
इसी के साथ, नैनीताल हाईकोर्ट से जुड़ी एक अन्य बड़ी खबर में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपी पूर्व अपर सचिव समाज कल्याण रामबिलास यादव को झटका लगा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाषिनी उपध्याय की खंडपीठ ने रामबिलास यादव की याचिका को खारिज कर दिया है। हालांकि, अदालत ने उन्हें अलग-अलग याचिकाओं के जरिए चुनौती देने की छूट दी है।
पूर्व आईएएस अधिकारी रामबिलास यादव उत्तराखंड सरकार में समाज कल्याण विभाग के अपर सचिव रह चुके हैं और इससे पूर्व उत्तर प्रदेश में लखनऊ विकास प्राधिकरण के सचिव पद पर भी तैनात रहे हैं। उनके खिलाफ लखनऊ में आय से अधिक संपत्ति की शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद उत्तराखंड सरकार के सतर्कता विभाग ने जांच शुरू की थी।
विजिलेंस जांच के दौरान लखनऊ, देहरादून और गाजीपुर स्थित उनके विभिन्न ठिकानों पर की गई छापेमारी में आय से अधिक संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए थे। शासन ने 18 अक्टूबर 2021 को जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था, जिसे बाद में भंग कर दिया गया था। समिति को भंग करने और संबंधित आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका को ही अब हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है।

