उत्तराखंड: नैनीताल और टिहरी में स्थापित होंगे ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन, किसानों को मिलेगी सटीक जानकारी

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देहरादून। उत्तराखंड के किसानों को भविष्य में मौसम का सटीक पूर्वानुमान और कृषि से जुड़ी हर जरूरी जानकारी समय पर मिल सकेगी, जिससे उनके कृषि कार्यों को नई दिशा मिलेगी। इसी उद्देश्य के साथ जलागम विभाग और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के बीच वैज्ञानिक अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस करार के तहत नैनीताल के सिनार गधेरा और टिहरी के सौंग नदी क्षेत्र में एक-एक अत्याधुनिक ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।

जलागम विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन वेदर स्टेशनों के माध्यम से किसानों को वर्षा का पूर्वानुमान, तापमान, आर्द्रता, वायु की गति, दिशा और वातावरणीय दबाव जैसी रियल-टाइम जानकारियां आसानी से मिल सकेंगी। यह तमाम जानकारियां किसानों को पारंपरिक खेती से हटकर वैज्ञानिक पद्धति अपनाने में बेहद मददगार साबित होंगी।

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परियोजना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आईआईटी रुड़की इन दोनों स्थानों पर ऑटोमैटिक वेदर स्टेशनों के साथ टीडीआर सेंसर भी लगाएगा। इन सेंसर्स की मदद से खेतों की मिट्टी में नमी की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन किया जा सकेगा। इसके आधार पर किसान अपने खेतों में पानी का अनावश्यक इस्तेमाल रोकने के साथ केवल नमी कम होने पर ही सिंचाई करेंगे।

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तकनीकी प्रक्रिया को विस्तार देते हुए आईआईटी रुड़की इन स्थलीय सेंसर्स से मिलने वाले डेटा का मिलान उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों से भी करेगा। इस वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए राज्य के अन्य हिस्सों में भी उपग्रह डेटा के आधार पर मिट्टी की नमी का सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा। साथ ही, इस पूरी परियोजना के अंतर्गत वाष्पीकरण और कार्बन उत्सर्जन के स्तर को भी मापा जाएगा।

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इस पूरी साझेदारी की पुष्टि करते हुए सारा की सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर कहकशां नसीम ने बताया कि जलागम विभाग और आईआईटी रुड़की का यह कदम राज्य के कृषि और जल संरक्षण क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। इस तकनीकी पहल से पहाड़ी और मैदानी इलाकों के किसानों को समय रहते मौसम के बदलावों की जानकारी मिल जाएगी, जिससे वे अपनी फसलों को संभावित नुकसान से सुरक्षित रख सकेंगे।