लक्ष्मणझूला में गंगा घाट पर टप्पेबाजी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, महाराष्ट्र के 3 शातिर चोर 24 घंटे में गिरफ्तार

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उत्तराखंड की पौड़ी गढ़वाल पुलिस ने मुस्तैद पुलिसिंग और त्वरित कार्रवाई का बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए गंगा घाटों पर सक्रिय टप्पेबाजों के एक बड़े गिरोह को बेनकाब किया है। यह पूरा मामला 27 मई 2026 का है, जब दिल्ली निवासी नरेश कुमार वर्मा ने कोतवाली लक्ष्मणझूला में शिकायत दर्ज कराई कि गीता भवन के पास गंगा घाट पर स्नान करते समय किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनका बैग चोरी कर लिया है, जिसमें लगभग 14 से 15 हजार रुपये की नकदी, आईफोन, कीमती घड़ी और महत्वपूर्ण दस्तावेज मौजूद थे।

घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी सर्वेश पंवार ने मामले के जल्द खुलासे और आरोपियों की गिरफ्तारी के सख्त निर्देश जारी किए। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस वारदात के महज 24 घंटे के भीतर तीन शातिर टप्पेबाजों को धर दबोचा और चोरी किया गया शत-प्रतिशत माल भी सुरक्षित बरामद कर लिया।

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पुलिस टीम का गठन और ऐसे जाल में फंसे आरोपी

एसएसपी के निर्देशों के क्रम में क्षेत्राधिकारी सदर और श्रीनगर तपेश कुमार के पर्यवेक्षण तथा लक्ष्मणझूला के प्रभारी निरीक्षक सूर्यभूषण नेगी के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया था। इस टीम ने घटनास्थल और उसके आसपास के तमाम रास्तों पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज को बेहद बारीकी से खंगाला और स्थानीय स्तर पर अपने मुखबिरों को सक्रिय कर सुरागरसी शुरू की।

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लगातार निगरानी, सघन चेकिंग और बेहतरीन टीमवर्क के दम पर पुलिस ने संदिग्धों की पहचान कर ली। इसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने 28 मई 2026 को लक्ष्मणझूला के बाईपास तिराहे के पास घेराबंदी करके तीनों आरोपियों को उस समय दबोच लिया, जब वे वहां से भागने की फिराक में थे।

गिरफ्तार टप्पेबाजों का विवरण और बरामद सामान

पुलिस की गिरफ्त में आए तीनों आरोपी मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले हैं, जो उत्तराखंड के तीर्थ स्थलों पर भीड़ का फायदा उठाकर चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे। इनमें 40 वर्षीय परेश अमरसिंह शालुंके, 47 वर्षीय विनोद प्रदीप शालुंके और 38 वर्षीय विक्रांत अनिल परमाल शामिल हैं।

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पुलिस ने जब इन आरोपियों की तलाशी ली, तो इनके पास से चोरी की गई 14,050 रुपये की नकदी और पीड़ित नरेश कुमार वर्मा व उषा वर्मा के महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे ड्राइविंग लाइसेंस और पहचान पत्र आदि पूरी तरह बरामद हो गए। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें माननीय न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया है और अब उनके पुराने आपराधिक इतिहास की कुंडली भी खंगाली जा रही है।

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