उत्तराखंड सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ‘स्वामी विवेकानंद उत्तराखंड ई-पुस्तकालय योजना’ को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य नई शिक्षा नीति-2020 के तहत डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देना है। इस पहल के माध्यम से अब प्रदेश के किसी भी कोने में बैठा छात्र महज एक क्लिक पर ऑनलाइन एकीकृत प्लेटफॉर्म के जरिए सभी पाठ्यक्रमों की ई-बुक्स, शोध पत्र, मैजीन और अन्य डिजिटल कंटेंट आसानी से प्राप्त कर सकेगा। शासन की ओर से इस संबंध में सभी कुलपतियों और उच्च शिक्षा निदेशकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि आर्थिक या भौगोलिक बाधाओं के कारण कोई भी छात्र शिक्षा से वंचित न रहे।
ई-लाइब्रेरी योजना के लाभ
इस योजना को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करती है। एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को न केवल पाठ्यपुस्तकें मिलेंगी, बल्कि उन्हें विश्व स्तर के उत्कृष्ट लेखकों की किताबें, महत्वपूर्ण शोध पत्र, दैनिक न्यूज़पेपर और विभिन्न रिपोर्ट्स भी उपलब्ध कराई जाएंगी। डॉ. रावत ने स्पष्ट किया है कि ई-लाइब्रेरी का लक्ष्य प्रदेश के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना है, जिससे छात्रों को महंगी किताबें खरीदने की मजबूरी या पुस्तकालयों की कमी का सामना न करना पड़े। यह सुविधा छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता को निखारने में मील का पत्थर साबित होगी।
निजी संस्थानों के लिए शुल्क की नई तैयारी
सरकार ने इस योजना का दायरा निजी संस्थानों तक भी फैलाया है, जिसमें तकनीकी शिक्षा, आयुष और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े निजी विश्वविद्यालय और महाविद्यालय भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इन निजी विश्वविद्यालयों को इस सेवा का लाभ उठाने के लिए 5 लाख रुपये का वार्षिक शुल्क देना होगा, जबकि अशासकीय कॉलेजों और शोध संस्थानों के लिए यह राशि 1 लाख रुपये प्रति वर्ष निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त, एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में डॉ. धन सिंह रावत ने राज्य के विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में ‘दून सिल्क’ ब्रांड की ड्रेस अनिवार्य करने के निर्देश दिए हैं। इससे न केवल स्थानीय रेशम उद्योग और बुनकरों को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि हर साल दीक्षांत समारोहों में होने वाली ड्रेस की मांग से स्थानीय बाजार को भी मजबूती मिलेगी।

