नंबर वन सीएम की ओर कदम बढ़ाते धाकड़ धामी राज्य के सियासी इतिहास में हर रोज नए नए अध्याय लिख रहे हैं। जिस रफ्तार से उनका राजकाज चल रहा है उससे तय है कि वे राज्य के तीसरे मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी का पांच साल सीएम पद पर रहने का रिकार्ड 4 जुलाई को तोड़ देंगे। लेकिन इसके साथ ही वे 5 जुलाई से नया इतिहास भी लिख देंग छठे साल में प्रवेश करने वाले राज्य के पहले मुख्यमंत्री।
दरअसल धाकड़धामी को 4 जुलाई 2021 को पहली बार सीएम पद की बागडोर सौंपी गई थी। जबकि 2022 का विधानसभा चुनाव उन्ही के मुख्यमंत्री रहते हुए हुए थे और आलाकामान ने सीएम धामी को ही धाकड़ माना था और खटीमा सीट हारने के बावजूद उन्हें सीएम पद पर बनाए रखा।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन नबीन हों या पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह सभी सीएम धामी को अभय का वरदान दे चुके हैं ऐसे में तय है कि 2027 के विधानसभा चुनाव भी भाजपा उन्हीं की अगवाई में लड़ेगी। ऐसे में राज्य के सियासी इतिहास में धामी ऐसे पहले सीएम बन जाएंगे जो लगातार छह साल सीएम पद पर रहे और जिनकी अगवाई में पार्टी चुनावी मैदान में जाएगी।
मतलब धाकड़ धामी धुरंधर साबित हो रहे हैं और उस कहावत को अभी तक चरितार्थ कर रहे हैं कि न भूतो न भविष्यति। हालांकि भविष्य किसी ने नहीं देखा लेकिन आलाकमान का जो उन पर विकल्प रहित संकल्प वाला भरोंसा है वो इसकी ओर इशारा कर रहा है और करें भी क्यों नहीं सीएम धामी ने अपने कार्यकाल में कई ऐसी योजनाएं बनाई कई ऐसे काम किए जो नजीर बन गए हैं।
सीएम धामी के आज तक के चार साल नब्बे दिन के कार्यकाल में अब तक बत्तीस हजार से ज्यादा नौजवानो को सरकारी नौकरी मिल चुकी है। हालांकि अभी पांच साल पूरे नहीं हुए हैं। 23 मार्च 2027 को पांच साल पूरे होंगे। बावजूद इसके CM धामी मौजूदा एक हजार पांच सौ पचास दिन के कार्यकाल में बत्तीस हजार से ज्यादा सरकारी नौकरियां मतलब हर दिन औसतन तकरीबन 21 नौजवानो को सरकारी नौकरी मिली है। जो शायद दूसरी सकरारों के दौर में मुनासिब नहीं रहा होगा। अगर पिछली सरकारों ने भी युवाओं के सपनो पर पंख लगाए होते तो धामी राज में इतनी नौकरियां मिलने के बाद भी सूबे के नौजवान नौकरियों के लिए सड़क पर नहीं होते।
लेकिन सीएम धामी युवाओं की आवाज बन रहे हैं उनकी पीड़ा को समझ रहे हैं तभी तो आज आईटीआई के साथ नामी कंपनियां करार कर रही हैं आईटीआई करने वाले नौजवानों को पढाई के साथ-साथ काम सिखाने को राजी हो रही हैं। वहीं सीएम धामी की सरकार की हसरत है कि सूबे के नौजवान नौकरी वाला नहीं नौकरी देने वाला बने इसके लिए नई नई नीतियां बनाई जा रही है ताकि राज्य में स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिले।

