देहरादून। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ठीक ही कहा कि धामी अब धाकड़ से धुरंधर बन गए हैं। महाभारत में जैसे अर्जुन की निगाहें अपने लक्ष्य पर टिकी रहती थी, ठीक वैसे ही सीएम धामी की नजर भी अपने लक्ष्य पर सधी है। शायद यही वजह है कि धामी कैबिनेट ऐसे-ऐसे फैसले ले रही है जिनका जनता लंबे समय से इंतजार कर रही थी।
मसलन सैनिक बहुल राज्य में पूर्व सैनिक और उनके परिवारों को निशुल्क कानूनी सहायता मिलेगी। धामी कैबिनेट ने उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नियमावली संशोधन 2026′ को मंजूरी दी गई। इस संशोधन के तहत अब पूर्व सैनिक और उनके परिवारों को निशुल्क कानूनी सहायता मिल सकेगी।
सीएम धामी की सरकार ने फैसला लिया है कि जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में पदेन सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा। इससे पूर्व सैनिकों से जुड़े मामलों की बेहतर पैरवी हो सकेगी और जरूरत के वक्त स्थानीय स्तर पर तुरंत कानूनी मदद मिल सकेगी।
देखा जाए तो ये फैसला जरूरी था उसकी वजह है राज्य के हजारों हजार सैनिक परिवार। अममून देखा जाता है कि जमीन-जायदाद, पेंशन, पारिवारिक विवाद जैसे तमाम मामलों आम आदमी की तरह ही राज्य के सैनिक परिवारों के भी लफड़े रहते हैं। जिसके लिए अक्सर कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है।जहां महंगे वकीलों की फीस के चलते कई सैनिक परिवार इंसाफ से वंचित रह जाते हैं ।
लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। सैनिक परिवार या उसके आश्रित सैनिक कल्याण अधिकारी को दर्ख्वास्त देकर अपनी फरियाद बतांएगे और मामला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सामने हाजिर होगा जहां सैनिक कल्याण अधिकारी खुद केस को मॉनिटर करेंगे।

