उत्तराखंड के उद्योग व ग्राम्य विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी ने राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में आर्थिक सुधार के लिए नई योजनाओं की घोषणा की है. सरकार का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में स्टील फैब्रिकेशन के साथ-साथ जड़ी-बूटी और बागवानी आधारित लघु खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को मजबूती देना है. इसके लिए खादी ग्रामोद्योग की खाली पड़ी जमीनों का उपयोग किया जाएगा ताकि सरकारी निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री स्थानीय स्तर पर ही तैयार हो सके. मंत्री जी का मानना है कि सड़क और रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने से अब इन क्षेत्रों में उद्योग लगाना आसान होगा और युवाओं को अपने घर के पास ही रोजगार के अवसर मिलेंगे.
पलायन पर नया दृष्टिकोण और बुनियादी ढांचा
मंत्री भरत सिंह चौधरी ने पलायन की परिभाषा को लेकर एक अलग नजरिया पेश किया है, उनका कहना है कि बेहतर भविष्य और रोजगार की तलाश में पहाड़ से बाहर जाना पलायन नहीं है, क्योंकि लोग आज भी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि ऑल वेदर रोड और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन जैसी बड़ी सौगात मिलने से अब पहाड़ में उद्योगों के प्रति नजरिया बदलेगा. सरकार का लक्ष्य बुनियादी ढांचे को इतना मजबूत करना है कि स्थानीय युवा अपने ही क्षेत्र में उद्यमी बन सकें और उन्हें बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े।
पशुपालन और श्वेत क्रांति के जरिए आजीविका
जंगली जानवरों द्वारा खेती को होने वाले नुकसान को देखते हुए सरकार अब पशुपालन को सबसे सुरक्षित विकल्प के रूप में बढ़ावा दे रही है. पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका को सशक्त बनाने के लिए ‘श्वेत क्रांति’ पर जोर दिया जा रहा है, जिसके तहत किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए दूध पर चार रुपये प्रति लीटर का प्रोत्साहन दिया जा रहा है. यह योजना उन किसानों के लिए मददगार साबित होगी जो जंगली जानवरों के डर से खेती छोड़ रहे थे, जिससे उन्हें एक स्थायी आय का साधन मिल सकेगा।

