नीट 2026 निरस्त से  देशभर में आक्रोश, CBI करेगी जांच

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राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने भारी विवाद और पेपर लीक के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद नीट-यूजी 2026 की परीक्षा को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद इस पूरे मामले की जांच अब CBI को सौंप दी गई है, जिसने केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

इस मामले में नासिक से एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई है और राजस्थान सहित अन्य राज्यों से लगभग 20 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। इस फैसले से देश के लगभग 22.79 लाख विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है, हालांकि एनटीए ने जल्द ही दोबारा परीक्षा आयोजित करने का आश्वासन दिया है।

मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी

पेपर लीक मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसकी कमान सीबीआई को सौंप दी है। जांच में सामने आया है कि परीक्षा से कई दिन पहले ही सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर पेपर के सवाल वायरल हो गए थे। नासिक पुलिस ने एक आरोपी शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर 10 लाख रुपये में पेपर खरीदकर उसे ऊंचे दामों पर बेच रहा था। पुलिस की शुरुआती जांच में यह भी पता चला है कि वायरल हुए 410 सवालों में से 120 सवाल असली प्रश्नपत्र से पूरी तरह मेल खाते थे, जिसके कारण परीक्षा की शुचिता भंग हुई।

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पेपर लीक मामले पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की चुप्पी

वर्ष 2024 में हुए पर्चा लीक के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने देश की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और अचूक बनाने का भरोसा दिलाया था, लेकिन हालिया घटनाओं ने इन दावों की पोल खोल दी है। परीक्षा रद्द होने जैसे गंभीर संकट के बावजूद शिक्षा मंत्री की ओर से अब तक कोई ठोस जवाब या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जब मीडिया ने उनसे पेपर लीक से संबंधित सवाल पूछने की कोशिश की, तो उन्होंने चुप्पी साधे रखी और बिना कोई प्रतिक्रिया दिए वहां से चले गए, जिससे सरकार के दावों और कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहे हैं।

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NTA महानिदेशक ने ली पूरी जिम्मेदारी

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने हालिया पेपर लीक की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि पेपर लीक का यह सिलसिला तुरंत खत्म होना चाहिए, क्योंकि यह छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और बड़ी समस्या बन गया है। सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए दो लाख से अधिक अधिकारी और कर्मचारी तैनात थे, फिर भी इतनी बड़ी तैयारी के बावजूद पेपर लीक हो गया। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया है कि यदि किसी भी परीक्षा में अनियमितता पाई जाती है, तो उसे रद्द करने का फैसला लिया जाएगा, क्योंकि जांच के बहाने छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।

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देशभर में आक्रोश

परीक्षा रद्द होने की खबर के बाद देशभर में छात्रों और विभिन्न संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। तिरुवनंतपुरम से लेकर दिल्ली तक छात्र सड़कों पर उतरकर न्याय की मांग कर रहे हैं। विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है और शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। एनटीए प्रमुख ने पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है, ताकि भविष्य में इस तरह की धांधली को रोका जा सके।

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