जिस तापमान की उम्मीद उत्तराखंड के बुजुर्गों ने कभी की नहीं होगी, उस तापमान से उत्तराखंड साल 2026 में रु-ब-रू हो रहा है। गरमी के मौसम में बिजली कटौती कोढ़ में खाज जैसी महसूस हो रही है । आलम ये है कि राज्य में मई के इस दूसरे पखवाड़े में गरमी ने बिजली की मांग को इतना बढ़ा दिया है कि यूपीसीएल जरूरत के मुताबिक पूरी बिजली सप्लाई नहीं कर पा रहा है। हाल ये हैं कि यूपीसीएल बिजली आपूर्ति दुरुस्त करने के लिए अपनी जेब खोले हुए है लेकिन 10 रूपए प्रतियूनिट की दर पर भी बाजार से बिजली नहीं मिल पा रही है।

ऐसे में सरकार ने बिजली की फिजूलखर्ची रोकने की अपील की है साथ-ही-साथ पीक आवर्स में बिजली बचाने की गुजारिश भी की ताकि हालात कंट्रोल में रहे। लेकिन हालात सुधरता न देख सरकार ने सीधे ऐलान कर दिया है कि जिन घरों में बिजली खपत 100 यूनिट तक रहेगी उन उपभोक्ताओं को 50 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी।
जबकि उच्च हिमालयी क्षेत्रों के लिए यह मानक 200 यूनिट निर्धारित किया गया है। कहा जा रहा कि सरकार की इस पहल से आमजन को विद्युत बिलों में राहत मिलेगी और आर्थिक भार कम होगा। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि गरमियों में जब ज्यादातर इलाकों में पानी बिना मोटर के न आता हो, दिन में दो बार नहाए बिना चैन न मिलता हो ऐसे वक्त में पूरे महीने 100 यूनिट बिजली में काम चलाना मुमकिन है क्या? हालांकि राष्ट्रहित में बिजली बचाने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए और कोशिश करने में हर्ज ही क्या है !

