दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे पर बना 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर न केवल यात्रा को सुगम बनाएगा, बल्कि यह वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार, यह एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर है, जो विकास और पर्यावरण के बीच एक बेहतरीन संतुलन का उदाहरण पेश करता है। यह कॉरिडोर शिवालिक और राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे घने वन क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिससे भविष्य में मानव और वन्यजीवों के बीच होने वाले टकराव में भारी कमी आने की उम्मीद है।
आधुनिक तकनीक से बचे हजारों पेड़
इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि पर्यावरण संरक्षण रही है। शुरुआत में इस निर्माण के लिए लगभग 45,000 पेड़ों को काटने की योजना थी। हालांकि, वैज्ञानिकों की कुशलता और आधुनिक तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से 33,840 पेड़ों को कटने से बचा लिया गया। अंततः केवल 11,160 पेड़ ही काटने पड़े, जो कि शुरुआती अनुमान से बेहद कम है।
पर्यावरण संरक्षण और भविष्य के फायदे
सरकार ने केवल पेड़ बचाए ही नहीं, बल्कि भारी संख्या में पौधारोपण भी किया है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में लगभग 165.5 हेक्टेयर वन भूमि पर 1.95 लाख नए पेड़ लगाए गए हैं। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी की देखरेख में 40 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि से ईको-रेस्टोरेशन के कार्य किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस कॉरिडोर के बनने से अगले 20 वर्षों में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 240 मिलियन टन की कमी आएगी, जो पर्यावरण के लिए एक बड़ी राहत होगी।

