देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए शुरू की गई करोड़ों रुपये की भूमिगत बिजली लाइन परियोजना चालू होने से पहले ही बदहाली के आंसू रो रही है। शहर की बिजली व्यवस्था को तारों के जंजाल से मुक्ति दिलाने के लिए सड़क किनारे लगाए गए कीमती और संवेदनशील पैनल बॉक्स अभी से टूटने लगे हैं। इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही के कारण स्थानीय नागरिकों और राहगीरों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
सड़क किनारे और फुटपाथों पर लगाए गए इन पैनल बॉक्सों के क्षतिग्रस्त होने का सीधा असर देहरादून के सबसे व्यस्त और व्यावसायिक इलाकों पर पड़ रहा है। घरों और दुकानों के बिजली कनेक्शन को अंडरग्राउंड मुख्य लाइन से जोड़ने के लिए ये बॉक्स लगाए गए थे, लेकिन उचित देखरेख और घटिया रख-रखाव के कारण योजना के धरातल पर उतरने से पहले ही इनकी दुर्दशा शुरू हो गई है।
इन प्रमुख इलाकों में बदहाल पड़े हैं बिजली बॉक्स
पटेलनगर विशाल मेगा मार्ट के ठीक पास लगा एक मुख्य मेगा पैनल बॉक्स पूरी तरह से टूटकर बिखर चुका है। ट्रांसपोर्ट नगर के पास लगे भूमिगत बिजली लाइन के पैनल बॉक्स के सुरक्षा ढक्कन पूरी तरह से गायब हो चुके हैं। शहर के कई अन्य अंदरूनी और मुख्य मार्गों पर भी बॉक्स क्षतिग्रस्त हैं, जहां सुरक्षा ढक्कन न होने से खुले तार और उपकरण नजर आ रहे हैं।
बिजली चालू हुई तो हो सकता है बड़ा हादसा
सुरक्षा के लिहाज से सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ढक्कन गायब होने और बॉक्स टूटने के कारण अब इन संवेदनशील बिजली उपकरणों के भीतर भारी मात्रा में कूड़ा-करकट जमा होने लगा है। राहत की बात सिर्फ इतनी है कि अभी तक इन लाइनों में हाई-वोल्टेज करंट की सप्लाई शुरू नहीं की गई है, अन्यथा खुले और टूटे पड़े ये बॉक्स किसी भी राहगीर के लिए सीधे मौत का जाल साबित हो सकते थे।
इस बदहाली ने योजना के निर्माण कार्य की गुणवत्ता, उपकरणों के चयन और बिजली विभाग की नियमित मॉनिटरिंग की नीति पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय जनता का साफ कहना है कि टैक्सपेयर्स की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये इस प्रोजेक्ट पर पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है।
सड़क किनारे खुले और क्षतिग्रस्त पड़े इन लाइव-लोकेशन बिजली बॉक्सों को लेकर देहरादून के नागरिकों में खासा आक्रोश है। स्थानीय जनता ने बिजली विभाग और शासन के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस घोर लापरवाही का तुरंत संज्ञान लिया जाए। सभी प्रभावित और टूटे हुए पैनल बॉक्सों को तत्काल बदला जाए और नए सुरक्षा ढक्कन लगाए जाएं ताकि भविष्य में जब बिजली सप्लाई शुरू हो, तो किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

