देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बहुचर्चित रिटायर्ड ब्रिगेडियर एमके जोशी हत्याकांड में जिला एवं सत्र अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। सत्र न्यायाधीश हरीश कुमार गोयल की अदालत ने इस सनसनीखेज मामले के दो मुख्य आरोपियों आदित्य चौधरी और समीर चौधरी की जमानत याचिकाएं पूरी तरह खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थान पर अंधाधुंध फायरिंग करना एक गंभीर अपराध है, इसलिए आरोपियों को जमानत देने का कोई ठोस आधार नहीं है।
मॉर्निंग वॉक पर निकले ब्रिगेडियर को लगी थी गोली
यह सनसनीखेज वारदात 30 मार्च की सुबह देहरादून के सिनोला-जोहड़ी गांव के पास हुई थी। यहाँ दो वाहनों में सवार कुछ लोग आपस में पीछा करते हुए अंधाधुंध गोलियां चला रहे थे। इसी दौरान सुबह की सैर पर निकले सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर एमके जोशी इस क्रॉस फायरिंग की चपेट में आ गए थे। गंभीर रूप से घायल ब्रिगेडियर की बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
आरोपियों की दलील: ‘हम छात्र हैं, पुलिस ने झूठा फंसाया’
अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों के वकीलों ने उन्हें छात्र बताते हुए भविष्य का हवाला दिया और जमानत की मांग की। कोर्ट के सामने बचाव पक्ष ने अपना तर्क देते हुए कहा कि मूल एफआईआर में उसका नाम दर्ज नहीं था और उसे महज शक के आधार पर पकड़ा गया है। घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है और वह 31 मार्च से लगातार जेल में बंद है। जबकि समीर चौधरी ने अपना पक्ष का तर्क रखते हुए कहा कि मामले में पूरी तरह झूठा फंसाया गया है। एफआईआर में उसका नाम नहीं था, पुलिस ने उसकी कोई शिनाख्त परेड नहीं कराई और पुलिस रिमांड के दौरान दिखाई गई हथियारों की बरामदगी भी फर्जी है।
‘आरोपी की निशानदेही पर बरामद हुई पिस्तौल’
सरकारी अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की इन दलीलों का पुरजोर विरोध किया। सरकारी वकील ने कोर्ट के सामने पुख्ता सबूत रखते हुए बताया कि पुलिस विवेचना के दौरान जुटाए गए गवाहों के बयान दोनों आरोपियों की संलिप्तता को साफ तौर पर उजागर करते हैं।
इसके साथ ही कोर्ट को बताया गया कि पुलिस ने आरोपी समीर चौधरी की निशानदेही पर ही वारदात में इस्तेमाल की गई पिस्तौल बरामद की है। यह घटना बीच सड़क पर हुई थी, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हुआ था। सत्र न्यायाधीश हरीश कुमार गोयल ने अपराध की गंभीरता और सबूतों को देखते हुए दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
बालावाला वार्ड-98 चुनाव विवाद: अब 13 जुलाई को अगली सुनवाई
ब्रिगेडियर हत्याकांड के फैसले के साथ ही जिला न्यायाधीश हरीश कुमार गोयल की अदालत में देहरादून के वार्ड संख्या-98 बालावाला के चुनाव विवाद को लेकर भी सुनवाई हुई। अदालत ने इस चुनाव याचिका पर आगे के ट्रायल के लिए मुख्य रूप से पांच बिंदु तय कर दिए हैं। अब इन्हीं बिंदुओं के आधार पर कोर्ट में साक्ष्य पेश किए जाएंगे और अंतिम बहस होगी।
यह चुनाव याचिका आशीष खत्री बनाम प्रशांत खरोला व अन्य के नाम से दाखिल की गई है। सोमवार को कोर्ट ने दोनों पक्षों के कानूनी तर्कों को रिकॉर्ड पर लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने इस चुनावी विवाद पर अगली सुनवाई के लिए आगामी 13 जुलाई की तारीख तय की है।

