देहरादून। राजधानी देहरादून के पर्वतीय क्षेत्र कालसी ब्लॉक से प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां नामांकित छात्रों की संख्या पूरी तरह शून्य होने के कारण नौ सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है। स्थिति को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती ने आधिकारिक आदेश जारी कर इन बंद पड़े स्कूलों में तैनात सभी शिक्षकों को दूसरे जरूरतमंद प्राथमिक विद्यालयों में समायोजित कर दिया है।
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, कालसी ब्लॉक के इन नौ राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में काफी समय से एक भी बच्चा नामांकित नहीं था। छात्र संख्या शून्य होने के बावजूद इन स्कूलों में शिक्षक नियमित रूप से सेवाएं दे रहे थे, जिससे शैक्षणिक संसाधनों का सही उपयोग नहीं हो पा रहा था।
शिक्षा विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, जिन प्राथमिक विद्यालयों में ताले लटके हैं उनमें टगरी, डयूडिलानी, लाच्छा, और बाघना शामिल हैं। इसके अलावा भंड्रोटा, मरलउ, रानीगांव, थत्येउ और लांघापोखरी के प्राथमिक विद्यालयों में भी छात्र संख्या शून्य दर्ज की गई है।
हैरानी की बात यह है कि शून्य छात्र संख्या वाले इन विद्यालयों में किसी में एक तो किसी में दो-दो शिक्षक तैनात थे। बिना किसी छात्र के स्कूलों का संचालन जारी रहने पर सवाल उठ रहे थे, जिसके बाद विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए शिक्षकों को ऐसे स्कूलों में भेजने का फैसला किया जहां अध्यापकों की भारी कमी चल रही थी।
शिक्षा अधिकारी के इस समायोजन आदेश के बाद अब उन प्राथमिक विद्यालयों को राहत मिलेगी, जहां बच्चों की संख्या तो अधिक है लेकिन शिक्षकों के पद खाली पड़े थे। इस कदम से जिले के अन्य प्राथमिक स्कूलों में पठन-पाठन की व्यवस्था सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है।
उत्तराखंड के ग्रामीण और पर्वतीय इलाकों में लगातार हो रहा पलायन अब सरकारी शिक्षा ढांचे को सीधे प्रभावित कर रहा है। कालसी ब्लॉक के नौ स्कूलों का एक साथ बंद होना और शिक्षकों का स्थानांतरण किया जाना राज्य में घटती छात्र संख्या और शिक्षा विभाग के सामने खड़ी चुनौतियों को साफ उजागर करता है।

