भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में रविवार को समान नागरिक संहिता विधेयक के मसौदे को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ऐलान किया कि इस ऐतिहासिक विधेयक को 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के पांच दिवसीय मानसून सत्र में पेश किया जाएगा, जिसका सीधा असर प्रदेश के सभी नागरिकों की सामाजिक और कानूनी व्यवस्था पर पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने इस फैसले को महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम करार दिया। प्रस्तावित यूसीसी विधेयक के दायरे में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, लिव-इन रिलेशनशिप, गोद लेने, उत्तराधिकार, सरोगेसी और सहायक प्रजनन तकनीक से जुड़े सभी मामलों के लिए एक समान कानूनी प्रावधान तय किए गए हैं।
मसौदे के अनुसार, राज्य के अनुसूचित जनजाति समुदाय को यूसीसी के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसके साथ ही, पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है, तथा राज्य में सभी विवाहों का कानूनी पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है।
विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बेहद कड़े नियम बनाए गए हैं। कानून के प्रावधानों के मुताबिक, यदि कोई शादीशुदा व्यक्ति लिव-इन रिलेशनशिप में रहता हुआ पाया जाता है, तो उसे 5 साल तक की कैद की सजा होगी। इसके अलावा, तलाक से जुड़े सभी विवादों के निपटारे के लिए पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था लागू होगी।
यूसीसी मसौदे में बच्चों के अधिकारों को पूरी सुरक्षा दी गई है। कानून के तहत विवाह, लिव-इन संबंध, गोद लेने, सरोगेसी और एआरटी तकनीक के जरिए जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा प्राप्त होगा।
उल्लेखनीय है कि देश में यूसीसी फिलहाल गोवा और उत्तराखंड में पूरी तरह लागू है, जबकि गुजरात और असम की विधानसभाएं भी इसे पारित कर चुकी हैं। अब मध्य प्रदेश इस बड़े कानून को लागू करने वाला अगला प्रमुख राज्य बनने जा रहा है।

