देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में त्योहारी सीजन के दौरान साइबर ठगों ने एक बार फिर अपने जाल फैलाने शुरू कर दिए हैं। ऑनलाइन खरीदारी, आकर्षक ऑफर्स और डिजिटल ट्रांजैक्शन की धूम के बीच साइबर अपराधियों ने चार अलग-अलग वारदातों को अंजाम देकर पीड़ितों से 7.89 लाख रुपये से अधिक की रकम ऐंठ ली है।
ठगी की पहली घटना कौलागढ़ की ऑडिट कॉलोनी की है, जहां अनुज सिंघल को बैंक अधिकारी बनकर फोन किया गया। आरोपी ने कार्ड सत्यापन के नाम पर फर्जी वेबसाइट पर उनकी व्यक्तिगत और क्रेडिट कार्ड की जानकारी के साथ ओटीपी हासिल कर लिया, जिसके बाद उनके खाते से 1,79,900 रुपये की खरीदारी कर ली गई। पीड़ित ने कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
दूसरा मामला गांधीग्राम, कांवली रोड का है, जहां अजय दुसेजा के मोबाइल पर एक अनजान लिंक आया। लिंक पर क्लिक करते ही उनके फोन का एक्सेस किसी अन्य के पास चला गया और आरोपियों ने आईडीएफसी बैंक खाते से तीन अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए 3.50 लाख रुपये उड़ा दिए। शहर कोतवाली पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।
तीसरी वारदात जाखन निवासी चंचल सोनी के साथ हुई, जिन्हें पेंशन योजना की जानकारी देने के बहाने व्हाट्सएप पर संदिग्ध एपीके फाइल भेजी गई। इस फाइल को डाउनलोड करते ही उनके आईसीआईसीआई बैंक खाते से एनईएफटी के जरिए 1.50 लाख रुपये निकल गए। पीड़िता ने 1930 पर साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई है।
चौथी घटना क्लेमेनटाउन स्थित हॉस्टल में रहने वाली ऋषिकेश निवासी वंशिका शर्मा के साथ हुई। वर्क फ्रॉम होम के नाम पर 700 फॉर्म भरने का झांसा देकर और फर्जी रसीदें थमाकर आरोपियों ने उनसे 1,09,000 रुपये ठग लिए। पुलिस ने चारों मामलों में एफआईआर दर्ज कर साइबर सेल की मदद से छानबीन तेज कर दी है।
राज्य में साइबर ठगी के आंकड़े बेहद डरावने हैं। अक्टूबर के पहले पखवाड़े में ही उत्तराखंड में ठगी की 1,625 शिकायतें सामने आईं, जिनमें कुल 7.16 करोड़ रुपये की चपत लगी। हालांकि, समय पर शिकायत करने के चलते पुलिस ने लगभग 2 करोड़ रुपये सुरक्षित बचा लिए हैं। पुलिस ने अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक या ओटीपी को साझा न करें और ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें।

